Kavita || Hindi Poetry || Poems in Hindi ||कविताएँ || जीवन का सफ़र

 Kavita || Hindi Poetry || Poems in Hindi ||कविताएँ 

जीवन का सफ़र
जीवन के सफर में चलता चला गया ,
रुका नहीं थका नहीं बहता चला गया ,
दर्द भी रहे ,रहीं खुशियाँ भी,
अपने भी रहे ,देखी दुनिया भी ,
जीतता भी रहा ,हुआ कभी बिफल,
क्या करेगा,कैसा रहेगा यह जीवन का सफ़र ||

कुछ दूरियाँ रहीं,रहीं नजदीकियाँ भी,
कुछ सोचें भी रहीं,रहीं चिंताएँ भी ,
बहुत काम किया,रहा आराम भी ,
सफर बीतता गया,न मिला विराम भी ,
कब तक रहेगा,कब खत्म होगा यह सफ़र,
क्या करेगा,कैसा रहेगा यह जीवन का सफ़र ||

एक छूटा तो दूसरा मिलता गया,
उधड़े धागों को लगातार सिलता गया,
एक तरफ से संभलता था,
दूसरी से बिखरता चला गया,
क्यों जिन्दगी रहती है तितर बितर,
क्या करेगा,कैसा रहेगा यह जीवन का सफ़र ||




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