बुधवार, 21 जुलाई 2021

आज का जीवन मंत्र | Aaj ka Jeevan Mantra

 आज का जीवन मंत्र | Aaj ka Jeevan Mantra


दृष्टिपूतंन्यसेत्पादंवस्त्रपूतंपिवेज्जलम् |

शास्त्रपूतंवदेद्वाक्यंमन:पूतंसमाचरेत ||


आज का जीवन मंत्र हिन्दी में 

अच्छी तरह से देखकर ही कदम आगे रखना चाहिए |वस्त्र से छानकर ही जल पीना चाहिए |शास्त्रानुसार ही वचन बोलने चाहिए  और सोच समझकर ही कार्य करना चाहिए |


Today's Life Mantra In English

One should step ahead only after seeing well. Water should be drunk after filtering through cloth. One should speak words according to scripture and act after thinking.

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आज का विचार | Aaj Ka Vichaar


जिस व्यक्ति का कहीं कोई मूल्य नहीं ,वह हर समय अपने को उच्चतम कहलाने कि कोशिश करता है और दूसरे उस के इस स्वभाव का भायदा लेकर उसे और उक्साते हैं |


Today' Thought | Aaj Ka Vichaar


A person who has no value anywhere, he tries to call himself the highest all the time and others take advantage of this nature of his and make him more excited and foolish.


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रविवार, 18 जुलाई 2021

Jeevan Mantra In Hindi | Today's Jeevan Mantra | आज का जीवन मंत्र

 Jeevan Mantra In Hindi | Today's Jeevan Mantra | आज का जीवन मंत्र



परोक्षेकार्यहंतारंप्रत्यक्षेप्रियवादिनम् ,

वर्जयेत्तादृशंमित्रंविषकुंभपयोमुखम् ||

  (चाण्क्य संहिता)


पीढ पीछे काम को बिगाड़ने बाले और सामने मीठी बातें करने बाले व्यक्ति को छोड़ देना चाहिए ,क्योकि वह मुख पर दूध से भरे और पूरी तरह से बिष से भरे घड़े के समान होता है |


Jeevan Mantra in English


The person who spoils the work behind and talks sweet in front should be left, because he is like a pitcher having milk on mouth and completely filled with poison.


Aaj Ka Vichar | Aaj ka Suvichar | आज का विचार


भाई बंधुओं कि संम्पत्ति पर अधिकार जमाकर सुख की अनुभूति करने बाला, आने बाले दु:ख और बिमारी का कारण  अपने कर्मों को ही बताता है ,पर पूछने पर उसे वह बुरे कर्म याद नहीं होते |


The one who feels happiness by taking possession of the property of his brothers, knows the reason for the coming sorrow and illness are his own deeds, but on asking, he does not remember those bad deeds.


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हास्य व्यंग्य शायरी | हास्य शायरी | हिन्दी हास्य शायरी

 हास्य व्यंग्य शायरी | हास्य शायरी | हिन्दी हास्य शायरी


दोस्तो आप सभी का स्वागत है हास्य व्यंग्य शायरी के मेरे इस  स्कंध में | आप को हास्य शायरी हँसा हँसा के पागल कर देगी | हिन्दी हास्य शायरी में दिए फोटो आप अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हैं |


1


पहली बार जो देखा,दिल में बसी तस्वीर तेरी,

सही में हैं या दूर से दिखती हैं आँखें भैंगी तेरी ||



2

आते जाते देखता हूँ तुझ को कुछ तो बात है ,

ठीक ठाक है तू पर तेरी दोस्त में कुछ तो बात है ||


3


मेक अप करती हो ,हमें लुभाने के लिए ,

ज्यादा भी ना किया करो,

कम ही अच्छा है हमें डराने के लिए ||


4


बिल्ली आँखें ,हिरनी सी चाल,

पता नहीं लोग तुम्हें क्या समझते हैं ,

इंसान हो तुम,जानवरों से तुलना क्यों करते हैं ||



5

शादी के बाराती कमरें मटका मटका झूमते हैं ,

पर लड़की के घर पहुँचते ही, ठेका क्यों ढूँढते हैं ||


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गुरुवार, 15 जुलाई 2021

Side effects of using mobile | अज कला दा प्यार

 Side effects of using mobile | अज कला दा प्यार



हीरो दिक्खेया ,हिरोइन भी दिक्खी,

इन्स्टा ते भी लेया सिक्खी |

फेसबुक्का च दोस्त बणाए ,

प्यारा आली कहाणी सिक्खी ||


अज कला दा प्यार भी ,कदेआ होई गया ,

Insta पर लव होई गया,facebooka पर सब होई गया ||


फोन हत्थाँ ते छुड़दा नी,मंजे पर रैहणा सई,

लाईकाँ जो देई देई,सुन्न गई उँगलियाँ होई |

कुन्नी ए short पैन्ने,कुनकी फोटो टाईटाँ च लई ,

दिला दियाँ हसरताँ च,पिचकेओ गै गाल होई ||


अज कला दा प्यार भी कदेहा होई गया,

भ्यागा-भ्यागा मिल्ले संजो सब होई गया |


ऑनलाईन ही रिचार्ज होआ दे,ऑनलाईन ही होआदे चार्ज ,

ऑनलाईन दोस्त बणादे,हुण कुछ नी रेआ राज |

लाईकाँ दी भुक्ख बढ़ी,हुण ओ नी रही मस्ती ,

नोखे-नोखे पोज बणाणे ,फोटो खिंजणा सब दस्सी ||


अज कला दा प्यार कदेआ होई गया,

दूरा ते ही सब होई गया ||


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सोमवार, 12 जुलाई 2021

जीवन मंत्र | आज का जीवन मंत्र | todays jeevan mantra | todays thought

 जीवन मंत्र | आज का जीवन मंत्र 


षट्कर्मणा शोधनञ्च आसनेन भवेदृढम् |

मुद्रया स्थिरता चैव प्रत्याहारेण धीरता ||

प्राणायामाल्लाघवञ्च  ध्यानात्प्रत्यक्षमात्मनि |

समाधिना निर्लिप्तञ्च मुक्तिरेव च संशया |


शरीर का शोधन छ: कर्मों से होता है , आसन से दृढता ,मुद्रा से स्थिरता,प्रत्याहार से धीरता,प्राणायाम से हल्कापन,ध्यान सै आत्म ज्ञान और समाधि से मुक्ति प्राप्त होती है |


Today's Jeevan Mantra


The purification of the body is done by six actions, firmness from posture, Stability from mudra, patience from pratyahara, lightness from pranayama, Self-knowledge from samadhi and liberation are attained through meditation.


आज का विचार


अच्छाई दूसरे के रास्ते में  खड्डे खोदने में नहीं |

जरूरत पड़ने पर जो आप के साथ हो वही अच्छा है |


Today's Thought


There is no good in digging holes in the path of others. Only good is him,Whoever is with you when you are in need.

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रविवार, 11 जुलाई 2021

हिमाचल कि सुन्दर सड़कें | हिमाचले दियाँ सड़काँ

 हिमाचल कि सुन्दर सड़कें | हिमाचले दियाँ सड़काँ 




सड़काँ महारियाँ,पहाड़ाँ पर चलदियाँ |

अज सुणाँदा ,सै कियाँ बणियाँ ||


राज अड़ेया,अड़ेया जफ्फा |

चन्दू अड़ेया,अड़ेया घप्पा ||

समझ जे आई इना जो |

फेरी सारेयाँ मिली जुली कम पूरा करेया |


सड़काँ महारियाँ,पहाड़ाँ पर चलदियाँ |

अज सुणाँदा ,सै कियाँ बणियाँ ||


टिक्कुएँ बोलेया ,माफी मंगा |

राजें बोलेया, देई दिखण डंगा ||

जौफियें बाया था केसर |

ताँ कियाँ दिन्दा खेतर ||


सड़काँ महारियाँ,पहाड़ाँ पर चलदियाँ |

अज सुणाँदा ,सै कियाँ बणियाँ ||


गर कोई भी नी खेतराँ दिंदे |

पैदल ही जाँदे सारे घुमणे ||

मुन्डू सारे कँवारे रैन्दे |

ना ही छोटे मोटे व्यापार हुन्दे ||


सड़काँ महारियाँ,पहाड़ाँ पर चलदियाँ |

अज सुणाँदा ,सै कियाँ बणियाँ ||


कई अड़े रहे,कईए कितियाँ मीटिंगाँ |

कई पत्र निकले,कई बणियाँ कहाणियाँ ||

ए जे गड्डियाँ ,सडका पर दौड़ा दियाँ |

पता नी कितनेयाँ कित्तियाँ कुर्बानियाँ ||



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शनिवार, 3 जुलाई 2021

Aaj Ka Vichaar | Jeevan Mantra

संस्कृत में जीवन मंत्र 


दुष्टाभार्याशठंमित्रंभृत्यश्वोत्तरदायक: ||

ससर्पेचगृहेवासोमृत्युरेवनसंशय |

Photo by Pixabay from Pexels


हिन्दी में जीवन मंत्र


दुष्ट पत्नी,मूढ़ मित्र और जबाब देने बाले सेवक

के साथ रहना ,साँपों से भरे घर में रहने के बराबर है और 

एसी स्थिती में मृत्यू अवश्यंभावी है |


Life Mantra in English


Living with a wicked Wife, foolish friend, and 

Answering Servant  is like living in a house full 

of snakes and in such condition death is inevitable.


Photo by Pixabay from Pexels



आज का विचार


गोत्र से अच्छा है ,इन्सानियत और भाईचारे से व्यक्ति को तोलो |


Todays thought


                       Do not judge anyone with gotra,judgement                     should be on the basis of humanity and fraternity.



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क्या माफ़ी होगी | Hindi Kavita | Kavita

क्या माफ़ी होगी 


Photo by Marcus Aurelius from Pexels


अच्छा किया जो तुम ने फिर से,  माफी का नाम लिया,

भूली हुई यादों को.  ,फिर दोबारा  याद किया ||


पूरे जीवन में तुम ने ,कब किसी का साथ दिया ,

जिस बर्तन में खाया तुम ने ,बस उसी में छेद कियी ||


जब किसी के शव पे, तुम ने नंगा नाच किया,

प्रतिफल के लिए ,आधार तूने तैयार किया ||


घर वाला जब किसी का ,अम्बर पर जा चुका था ,

मरा तो  वो था, पर तू भी अन्दर  मर चुका था ||


हाथ बाप का जब किसी के, मस्तक पर ना रहा,

लोगों के संग,तू भी बैठा, लगा रहा था कहकहा ||


इतनी विपत्ति आने पर भी ,तेरी भूख नहीं मिटी,

जो किसी के काम आनी थी,वो रोटी भी रही पड़ी ||


याद रख, फल कर्म का ,यहीं पे झेलना होगा,

माफी माफी ना कर, क्या कर्म तेरा  माफ होगा ||


मृत्यु शैया पर जब तू,अंतिम स्वासों पर होगा,

शीघ्र मृत्यु माँगेगा,पर वो भी माफी पर होगा |


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सोमवार, 14 जून 2021

खीरगंगा कि कथा

 खीरगंगा  कि  कथा 





सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


इक बोले मैं हूँ पहला, दूजा बोले मैं हूँ पहला |
श्रेष्ठता कि बात पर, दोनों में संघर्ष जा ठहरा ||
बच्चों में संघर्ष कि बात,जा पहुँची मात पिता के पास |
कैसे रूके संघर्ष, ढूँढना पड़ेगा कुछ खास ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


तीनों लोकों का भ्रमण जो कर आएगा पहली बार |
वही होगा श्रेष्ठ वही होगा पूज्य पहली बार ||
कार्तिकेय जी उछलकर, जा बैठे मोर पर |
गणेश जी कैसे जीते उलझे पड़े इस सोच पर ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


एकदन्त को उपाय सूझा, मात-पिता को बुला भेजा |
तीनों लोक उन में जान, परिक्रमा कर माथा टेका ||
प्रसन्न हुए मात-पिता, श्रेष्ठता का वरदान मिला |
कार्तिकेय नें यह जान, कैलाश को त्याग दिया ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


हिमाचल में पार्वती घाटी,पड़ता एक स्थान |
कार्तिकेय जी ऱहें जहाँ, करें काम महान ||
पुत्र को प्रसन्न करने मात पार्वती धरती पर आईं |
पुत्र की ख़ातिर, यहीं पर खीर की गंगा बहाई ||
उचित स्थान जानकर शिवजी भी प्रकट हुए |
यहीं पर करूंगा ध्यान, गौरां से यह शब्द कहे ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


मणिकर्ण के पास खीरगंगा है यह स्थान |
कार्तिकेय और शिवा, जहाँ रहते एक समान ||
कलयुग को आता देख, परशुराम ने यह काम किया |
खीर पर लड़ेगी जनता, तो खीरगंगा को बदल दिया ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


आज भी है गर्म पानी का झरना |
जहाँ उचित है स्नान करना ||
ध्यान का फल मिलेगा पूरा |
कोई काम नहीं रहेगा अधूरा ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||

ज्वालाजी कथा ,Maa Jawala JI

 ज्वालाजी कथा 


शिव का निरादर नी झेल सकी वो, 
हो गई हवन कुंड में सती वो |

लिए फिरे शिव जी  ,घवराई थी सृष्टी,
विष्णु जी सहाए,सृष्टी विनाश बचाए ||

जिह्वा गिरी जहाँ पर, अग्नि रूप भई वहाँ पर ||
एक गवाला गाय चराए,कोई कन्या दूध पी जाए ||

गवाले ने चमत्कार देखा, कन्या को होते ओझल देखा ||
गोरक्ष किले को धाए,राज भूमी को बात बताए ||

राज भूमी को बात पता थी,जिह्वा कि वो बात पता थी ||
पहाड़ी पर दौड़ के आए, ज्योति रूप में दर्शन पाए ||

मात ज्वाला भई सहाए,मंदिर का निर्माण कराए ||
पाँडव भी वनों में विचरते,, पहुँचे जब इस जगह पे ||

बहुत बड़ा मंदिर बनवाया, माँ सती का मान बढ़ाया ||
ज्वालामुखी नाम जगह का,जिला काँगड़ा पड़े यहाँ का||

ज्वाला रूप में दर्शन देती, भक्तों का दु:ख हर लेती ||
जो आए श्रद्धा संग, करे योग और ध्यान ||
सब इच्छा पूरी हो, मिले भोग और ज्ञान ||


ध्यानू भक्त ने अपना शीश माता ज्वाला को अर्पित किया,Dhyanu Bhagat

           ध्यानू भक्त ने अपना शीश माता ज्वाला  को 

                               अर्पित किया


मात ज्वाला भक्ति  तेरी, भक्ति करे भक्त ध्यानू |
भक्तों के संग दर्शन करने, चले भक्त कृपालू ||

बीच रास्ते संदेश पाए, अकबर का फरमान पाए |
कहाँ  चले भीड़ संग, क्या करना तुम को भाए ||

ध्यानू भक्त ने कह सुनाया, मात ज्वाला का महात्मय बताया |
अकबर यह सुन क्रोध में आया,ध्यानू के घोड़े को मार गिराया|


भक्ति तेरी सच्ची है, सच्ची है गर बात |
घोड़े को जीवित करेगी, गर ज्वाला मैया तेरे साथ ||


एक माह रखना राजा, मात करेगी पूरण काजा |
माता शक्ति को, तू भी मानेगा राजा ||

भक्त ध्यानू ध्यान करे, भजन करे दिन रात |
माता कि प्रसन्नता कि ख़ातिर, सिर दिया वार ||

मात ज्वाला प्रसन्न भई, दिया जीवन दान |
घोड़े को भी जीवित किया,दिया महाज्ञान ||


जो आए मंदिर में, आए माता के दरबार |
दु़:ख सारे दूर हों, सुखी रहे संसार ||

अकबर और माता ज्वाला कि कथा , Akbar and Mata Jawalaji

               अकबर और माता ज्वाला कि कथा |



वाह रे प्यार तेरा, माँ ज्वालाजी के साथ |
मरे को जीवन दिया, लगा दी नैया पार ||


अकबर राजे ने, जब देखा, जब देखा चमत्कार |
चल पड़ा सेना लेकर, ज्वालजी के पास ||
ज्वालाएँ जलती देख, परीक्षा लेने कि ठानी |
जल की धाराएँ मंदिर में बहा दीं ||


साथ मिले जिसे,मिले माँ का साथ |
मरे को जीवन दिया, लगा दी नैया पार ||


कैसे तेरे भक्त हैं, कैसा है इम्तिहान |
सुर हो या असुर, सब हैं एक समान ||
पानी में ज्वालाएँ जलीं, अकबर का मान घटाया |
सवा मन सोने का छत्र, ज्वाला माँ के चढ़ाया ||


जो भजे माँ को, करे याद दिन , रात |
मरे को जीवन दिया, लगा दी नैया पार ||


माँ को नहीं है लोभ ना चाह तेरे माल की |
चाह है भक्ति की और भक्त के प्यार की ||
अकबर के मान था, ना था माँ का सम्मान |
सोने को बदलकर,दूर किया अभिमान ||


आओ भक्ति लेकर, माँ को करो प्रणाम |
अपनी धन दौलत से, करो गरीबों में दान ||

माता ज्वाला का इंतज़ार ,Mata Jawala Ji

 माता ज्वाला का इंतज़ार 


नो ज्वालाएँ माता तेरी,जलें दिन और रात |
भक्तों के दु:ख हरे, सादा रहे भक्तों के साथ ||
गुरू गोरखनाथ जी करें, करें पूरी सब आस |
भक्ति करने थे बैठे, ज्वाला मंदिर के पास ||


भोजन पर बुलाने का माता ने किया विचार |
बड़ी कोशिशों से जिसे गोरखनाथ जी ने किया स्वीकार ||
खिचड़ी ही खाऊँगा माँ, लेकर आता हूँ कुछ चावल |
पानी उबालकर रखें, खाऊँगा लौटकर ||


उबाला जल, ज्योत कि महिमा है कैसी |
लौटे नहीं गोरखनाथ जी,माता प्रतीक्षा में बैठी ||
गोरख डिब्बी है वह जगह, पानी जहाँ है उबल रहा |
छूने पर होता ठंडा प्रतीत,महिमा बखान कर रहा|