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Aaj Ka Suvichar | आज का सुविचार | मुर्दा सिखाता है

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क्या भारतीय समाज में संवेदनहीनता बढ़ रही है , कैसे खुद को एक सेल्फ़िश इंसान बनाने से रोकें , Motivational Speech

  क्या भारतीय समाज में संवेदनहीनता बढ़ रही है || कैसे खुद को एक सेल्फ़िश इंसान बनाने से रोकें ?   दोस्तों आज की यह कड़वी बात , जो मैं आप को बताने जा रही हूँ , उसे मेरे दोस्त अनिल ने हिमाचल से मुझे भेजा है | उन की कहानी सुन के मुझे इंसान होने पर शर्म सी महशूस हो रही है | मैंने कहावत सुनी थी “अपने से तीसरे अच्छे होते हैं” , लेकिन आगे  आने वाली कुछ पंक्तियों में मैं आप को एक हकीकत बताने जा रही हूँ जो लगभग सभी के साथ घटित होती है | हमारे समाज मे कितनी कड़वी बात या कहें तो कड़वाहट भारी हुई है , हम खुद तो खुश हैं नहीं और दूसरे की खुशियाँ देखने का हम मे दम नहीं हैं | तो नीचे की कहानी को जरूर पढ़ें और कहानी अच्छी लगे तो कमेंट जरूर करें और इसे शेयर करना ना भूलें , क्योंकि आप के एक शेयर से किसी कोप सीख मिल सकती है | अनिल के गांव तक आपसी सहयोग से सड़क निकाली गई , लेकिन कुछ संवेदनहीन/ स्वार्थी लोगों के कारण गाँव के मुहाने पर पहुँचते ही सड़क का काम रोक दिया गया | अनिल कुछ और ना सोचते हुए खुश था की कोई बात नहीं , चलो अपनी गाड़ी गाँव तक तो पहुँच ही जाएगी | अब अनिल ने गाड़ी एक चौड़े मोड़ के किनारे खड़ी क

श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व | भगवद्गीता का अध्याय 1 का श्लोक 4 से 6 हिन्दी व English अर्थ सहित | Bhagwatgeeta Ka Mahatav

  श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व | भगवद्गीता का अध्याय 1 का श्लोक 4 से 6 हिन्दी व English अर्थ सहित लगभग 5000 वर्ष पहले  युद्ध के मध्य दिया गया एक हिन्दु धर्मोपदेश जिसे 18 अध्यायों और 700 श्लोकों में संजोया गया श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व ,आज भी पूरे विश्व के लिए एक विश्लेषण का विषय है |जब हम  गीता को पढ़ते हैं तो पाते हैं कि यह धर्मोपदेश जो कई बर्षों पहले दिया गया आज के युग में भी उतना ही कारगर है जितना उस समय था | मैं आप को हर रोज गीता के एक श्लोक का हिन्दी व English अर्थ बताऊँगी व यह भी बताने कि कोशिश करूँगी कि आज के आधुनिक युग में आप इसे कैसे कारगर सावित कर सकते हैं |श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व  _______________________________ भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 4 से 6 संस्कृत सञ्जय उवाच अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथ:        || 4|| धृष्टकेतुश्चेकितान: काशिराजश्च वीर्यवान् | पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गव:  || 5|| युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च  वीर्यवान् | सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथा:  || 6|| _______________________________ भगवद्गीता अध्याय

श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व | भगवद्गीता का अध्याय 1 का श्लोक 2 और 3 हिन्दी व English अर्थ सहित

  श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व | भगवद्गीता का अध्याय 1 का श्लोक 2 और 3 हिन्दी व English अर्थ सहित www.topperskey.com लगभग 5000 वर्ष पहले  युद्ध के मध्य दिया गया एक हिन्दु धर्मोपदेश जिसे 18 अध्यायों और 700 श्लोकों में संजोया गया श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व ,आज भी पूरे विश्व के लिए एक विश्लेषण का विषय है |जब हम  गीता को पढ़ते हैं तो पाते हैं कि यह धर्मोपदेश जो कई बर्षों पहले दिया गया आज के युग में भी उतना ही कारगर है जितना उस समय था | मैं आप को हर रोज गीता के एक श्लोक का हिन्दी व English अर्थ बताऊँगी व यह भी बताने कि कोशिश करूँगी कि आज के आधुनिक युग में आप इसे कैसे कारगर सावित कर सकते हैं | श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व   _______________________________ भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 2 और 3 संस्कृत सञ्जय उवाच दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं  दुर्योधनस्तदा | आचार्यमुपसंग्म्य राजा वचनब्रवीत् ||2|| पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं  चमूम | व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ||3|| _______________________________ भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 1 और 2 हिन्दी में अनुवाद संजय ने कहा  दुर्योधन, पाण्डवों की सेन

आज के युग में गीता का महत्व | भगवद्गीता का अध्याय 1 का श्लोक 1 हिन्दी व English अर्थ सहित

श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व | भगवद्गीता का अध्याय 1 का श्लोक 1 हिन्दी व English अर्थ सहित    लगभग 5000 वर्ष पहले युद्ध के मध्य दिया गया एक हिन्दु धर्मोपदेश जिसे 18 अध्यायों और 700 श्लोकों में संजोया गया आज भी पूरे विश्व के लिए एक विश्लेषण का विषय है | श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व  , जब हम गीता को पढ़ते हैं तो पाते हैं कि यह धर्मोपदेश जो कई बर्षों पहले दिया गया आज के युग में भी उतना ही कारगर है जितना उस समय था | मैं आप को हर रोज गीता के एक श्लोक का हिन्दी व English अर्थ बताऊँगी व यह भी बताने कि कोशिश करूँगी कि आज के आधुनिक युग में आप इसे कैसे कारगर सावित कर सकते हैं | _______________________ भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 1 संस्कृत   धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरूक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः || मामकाः पाण्डाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ||  ______________________________ भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 1 हिन्दी में अनुवाद   धृतराष्ट्र जी संजय से पूछते हैं,धर्म क्षेत्र कुरूक्षेत्र में युद्ध कि इच्छा में एकत्रित मेरे और पाण्डू के पुत्रों ने क्या किया |  ______________________________ Bhagwatgeeta Translati

Aaj Ka Suvichar | आज का सुविचार | कमियाँ क्या सिखाती हैं

  Aaj Ka Suvichar | आज का सुविचार | कमियाँ क्या सिखाती हैं हिन्दी मेें आज का विचार | आज का सुविचार खाली जेब, धन कि कद्र करना सिखाती है, खाली पेट, भोजन कि कद्र करना सिखाता है, बेईज्जती, आदर का महत्व सिखाती है , दुःख ,समस्याओं से लड़ना सिखाते हैं , अर्थात कमियाँ कुछ ना कुछ सिखाती हैं , और उन से सीखने बाला सफलता के सर्वोपरी सिखर को पाता है | Today's Thought in English |Aaj ka Vichar in English  Empty pocket teaches to value money,  Empty stomach teaches to value food, Disrespect teaches the importance of respect,  Problems,teaches to fight with sorrows,  That is, shortcomings teach something or the other, And one who learns from them finds the supreme success. अन्य पढ़ें कद्र किस की करें  छोड़ो ये पांच बातें अपने पैसे से ली हुई साईकल 18 बर्ष कि उम्र बाले ध्यान रखें सफलता किस पर निर्भर है कमज़ोर मत बनो सूरज

Aaj Ka Vichar | सूरज | आज का सूविचार

Aaj Ka Vichar | सूरज | आज का सूविचार हिन्दी मेें आज का विचार | आज का सुविचार  उगते सूरज की तरह शाँत व सुभाषित रहो ,जिन्दगी की हर मुश्किल आसानी से पार कर जाओगे Today's Thought in English |Aaj ka Vichar in English Be calm and graceful like the rising sun, you will overcome all the difficulties of life easily अन्य पढ़ें कद्र किस की करें  छोड़ो ये पांच बातें अपने पैसे से ली हुई साईकल 18 बर्ष कि उम्र बाले ध्यान रखें सफलता किस पर निर्भर है कमज़ोर मत बनो