मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

शिवा मेरा सर्पां वाला

 शिवा मेरा सर्पां वाला 

Photo by Elina Sazonova from Pexels

शिवा मेरा सर्पां वाला ,

हत्थाँ च विष दा प्याला |

गौराँ मैया संग बिराजे,

चँदा मामा सर पर साजे |


शिवा मेरा भोला भाला,

गले च रुद्राँ दी माला |

जटाँ च गंगा बिराजे,

हत्थाँ च शूल साजे |


शिवा मेरा डमरुआँ वाला ,

नंदिए पर घुमणे आला |

खाली झोली भरने वाला,

थोड़े च खुश होने आला |


Photo by Abhilash Subbayyan from Pexels




शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

क्यों बिगड़ रहा बचपन,क्यों बिगड़ रही जवानी ??

 क्यों बिगड़ रहा बचपन,

क्यों बिगड़ रही जवानी ??


बिगड़ा पड़ा है बचपन ,

बिगड़ी पड़ी जवानी,

ना कोई उद्देश्य है ,

ना कोई कहानी,

संभाल लो ए दोस्त,

किसी काम कि नहीं रहेगी रवानी |

Photo by mr_Jb_ 57 from Pexels

दोस्तो बहुत दुखी हो जाता है मन ,जब कोई बच्चा या जवान नशा करता हुआ,बीड़ी ,सिग्रेट पीता हुआ या गुन्डागर्दी करता हुआ मिलता है |आज बच्चों में प्रेम भावना,इज्जत सम्मान रहा ही नहीं |यह कैसी परवरिश कर रहे हम अपने भविष्य की |

क्या यह सही समय नहीं है कुछ करने का?क्या गंदी होती नदी को साफ नहीं किया जा सकता ?अगर साफ नहीं किया जा सकता तो क्या कोशिश भी नहीं की जा सकती ?एक बार सोच कर देखें |

आज हम  स्वार्थी हो गए हैं जब किसी बच्चे को बिगड़ते हुए देखते हैं ,तो उसे टोकने कि बजाए, अपने रास्ते चलते चले जाते हैं |बस सब कि यही सोच हो चुकी है कि "मेरे बच्चे ठीक हैंं,समझदार हैं और अच्छी आदतों बाले हैं,दूसरे का बिगड़ता है तो बिगड़े ,मेरा क्या जाता है " |

हम भूल जाते हैं कि एक मछली सारे तालाब को गंदा कर सकती है ,इस की कम से कम गंध तक तो आप के पास भी पहुँचेगी |

दोस्तों मैं आप कि सोच को तो बदल नहीं सकती ,पर  आप का सहयोग हो तो कुछ बदलाव लाया तो जा सकता है |

पुराने समय में गाँव-गाँव में मेले आयोजित किए जाते थे ,जिन में कुश्ती,तीरंदाजी और निशानेबाजी जैसे खेल आयोजित किए जाते थे |क्या सही सोच थी उस समय की व्यवसाय के साथ खेल की भावना ,वाह |इसी कारण उस समय के लोग खुशहाल और स्वस्थ होते थे |

मेले तो खत्म ही हो गए ,हम खेलों को भी खो बैठे |क्या कदम नही उठाए जा सकते,ताकि बच्चों में खेल कि भावना ,प्रतियोगिता कि भावना का विकास हो |



राजस्थान में रायमलबाड़ा के रहने बाले ऱिटायर्ड सैन्यकर्मी श्री भंवर सिंह भाटी जी एक उदाहरण हैं,जो कि युवाओं में अलग ही शक्ति का संचार कर रहे हैं |
आज कि राजनीति और समाज सेवा जहाँ धर्म और जातिवाद के इर्द-गिर्द घुम रही है,वहीं आप प्रत्येक युवा को केवल देश प्रेम और मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रोत्साहित कर,सेना मे जाने को प्रोत्साहित कर, उन्हें निशुल्क ट्रेनिंग देते हैं, होंसला बढाते हैं | इस गाँव के युवा अव खेलकूद में रुचि दिखाने लगे हैं |नशे का नामोनिशान दूर दूर तक नहीं है |सलाम है उस जीवन को जो कुछ लेकर नहीं,दे कर जाता है |

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पंचायतें,गाँव के वरिष्ठ लोग चाहें तो चंदा इक्ट्ठा कर के क्रिड़ाक्षेत्र बनाए जा सकते हैं,जहाँ बच्चे अपने अपने समय से आकर अभ्यास कर सकते हैं |चंदा इक्टठा कर प्रतियोगिताएँ की जा सकतीं हैं |जब बच्चे का नाम होगा तो और भी बच्चे आकर्षित होंगे |सब बच्चे एक जैसे नहीं होते ,कुछ दौड़ में आगे,कुछ पढ़ाई में आगे |बस इक मौके कि जरूरत है दुनिया बदल जाएगी|
वॉलिवॉल,बास्किटवॉल,बैडमिन्टन,कुश्ति,कराटे,दौड़ और तैराकी जैसी प्रतियोगिताएँ तो गाँव के स्तर पर भी हो सकती हैं |


दोस्तो सोच बदलो ,वक्त बदल जाएगा |
धन्यबाद,कोई बात कड़वी लगी हो तो माफ करें |

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शुक्रवार, 29 जनवरी 2021

Love Shyari


Photo by Innoh Khumbuza from Pexels


 1.     तेरे प्यार में क्या क्या न भुला बैठे ,

         दोस्तों को तो छोड़ा,तुझे ख़ुदा बना बैठे |

         पर ना कर बैठना बेवफाई,

         दिल का पता नहीं क्या कर बैठे |


2.     पहली बार जो उसे देखा ,मन में हलचल सी मच गई ,

        सोचा बात ही कर लूँ ,पर उसे देखते ही नज़र झुक गई,

        क्या बनाया ए खुदा जवानी को,नज़र टिकी तो टिकी ही रह गई |


3.     ढ़ाई अक्षर का नाम,हर जगह है बसुमार ,

हिला कर रख देता है ,जब चढ़ जाए खुमार |

हर कोई जानता इसे कहते जिसे प्यार ||


शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

नया दिन मुबारक

 नया दिन मुबारक



सूरज मुबारक,चाँद मुबारक,
नए साल का हर दिन मुबारक |
खुशियाँ मुबारक हो दुनिया मुबारक,
पहाड़ी पर चढ़ती रोशनी मुबारक |
चाँद कि चाँदनी मुबारक,तारों कि टिमटिमाहट मुबारक ,
ले जाएँ मंजिल की ओर वो सड़कें मुबारक |
पहाड़ मुबारक,मैदान मुबारक,
करें बर्षा वो बादल मुबारक |
पेड़ मुबारक,पौधे मुबारक,
हरे हर पीड़ा वो औषधी मुबारक |
पत्ता पत्ता मुबारक,जर्रा जर्रा मुबारक,
नई सुबह का नया जोश मुबारक |

बुधवार, 9 दिसंबर 2020

क्यों बेचारा है ये दिल

क्यों है बेचारा यह दिल

अकेला है तू ,नहीं मिल रहा है कोई,
बस खुद को गुम पाया,जब नज़र दौड़ाई |

सब कोई खुश हैं ,मस्त है हर कोई,
उसे भी दुःखी पाया,जब उस ने नज़र झुकाई |

घर से लाई रोटियों को खा रहा था कोई,
पास गया तो पाईं उस की भी आँखें रोईं,

गम दबा रहा था कोई ,हँसी में,
कोई भुला रहा था गम ,बातें कर कर,
कोई चुप सा बैठा था कोने में,
तो किसी की गुजर रही थी सोने में |

बस यही है सफर यही है कहानी,
जिसे सुनोगे हर दूर जाने बाले कि जुवानी |

रविवार, 6 दिसंबर 2020

क्या माँ के दिल को तोड़ना सही है ?जिस ने पाला जन्म दिया उसे दुःखी करना सही है ?

मेरी माँ
माँऊ मेरिएँ प्यारा नै है पालेआ,
रोंदे जो सदा संभालेया,
दुःख मेरे ,अपने दिला च लई,
खुशियाँ नै सदा सँवारेआ |

ताहली जे क्ल्ला हुँदा,
माँऊ दे चरणा च बैंदा,
माऊ दे गलाणे पर,
केड़े भी दुःखाँ जो सैंदा |

मैं हुँदा दुःखी ,
आँसू माऊ दे निकलदे,
मेरे जख्म दर्द माऊ जो दिन्दे,
फुल्लाँ जो मिन्जो देई ,
कण्डे माँ लई लैंदी,
माँ नी हुन्दी ताँ ,दुनिया कियाँ रैंदी |

लोग गाँव की तरफ किस कारण लौट रहे ,वह क्या है जो उन्हें गाँव बापिस ले कर आ रहा ?

ग्राएँ दी कहाणी
भ्यागा उट्ठी दातण किती,
नहाई धोई पूजा किती,
तुलसिया जो पाणी देई,
चुल्हे गोलू दित्ता रसोई|
वाह वाह ,क्या ग्राँ दी रीत बणाई,
सारेयाँ दा साथ,सारेयाँ संग प्रीत नभाई ||

छुलाणी च दही छोली ता,
खूब सारा मक्खण कड्डी ता,
भ्यागा भ्यागा गोडें जाई,
मही दा सारा दुध कड्डी ता |
वाह वाह ,क्या ग्राँ दी रीत बणाई,
सारेयाँ दा साथ,सारेयाँ संग प्रीत नभाई ||

दरातिया लई घाए जो जाणा,
दहिए कन्ने फुल्का खाणा,
प्यारा नै रैहणा,प्यारा नै गलाणा,
हत्थ बटाणा सारेयाँ नै जाणा,
वाह वाह ,क्या ग्राँ दी रीत बणाई,
सारेयाँ दा साथ,सारेयाँ संग प्रीत नभाई ||

ग्राएँ नी छड्डी सकदा,ग्राएँ ते दूर नी रही सकदा,
ग्राएँ दी रोटी ,ग्राएँ दा पाणी,
ग्राएँ दी महानता कुन्नी जाणी ||


शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

Chand Shyari

Chand Shyari
चाँद शायरी
1

चाँद को देख रहा हूँ ,चाँदनी बिछड़ी सी है |
अंधेरी रात में रोशनी बिखरी सी है |
चाँद बेचारा बुझा सा है ,
आज कहानी बिसरी सी है ||

2

रात में बाहर निकला,
दिन सा लग रहा है,
आज चाँदनी में नहा रहा है चाँद,
दिल सा लग रहा है|
चाँद था चाँदनी के आगोश  में ,
तभी चाँद खिला सा लग रहा है |

3

चाँद ज्यों-ज्यों चढ़ रहा आकाश में,
यादें ले रहीं मुझे आगोश में |
तेरे साथ कही बैठा था ,
एसी ही एक चाँदनी रात में |
तुझ को देख रहीं थीं नज़रें,
कुछ तो बोल रहीं थी नज़रें,
नज़रों के सागर में गोते लगा,
कुछ तो ढूँढ रही थी नजरें ||







गुरुवार, 3 दिसंबर 2020

जीवन का सफर

जीवन का सफ़र
जीवन के सफर में चलता चला गया ,
रुका नहीं थका नहीं बहता चला गया ,
दर्द भी रहे ,रहीं खुशियाँ भी,
अपने भी रहे ,देखी दुनिया भी ,
जीतता भी रहा ,हुआ कभी बिफल,
क्या करेगा,कैसा रहेगा यह जीवन का सफ़र ||

कुछ दूरियाँ रहीं,रहीं नजदीकियाँ भी,
कुछ सोचें भी रहीं,रहीं चिंताएँ भी ,
बहुत काम किया,रहा आराम भी ,
सफर बीतता गया,न मिला विराम भी ,
कब तक रहेगा,कब खत्म होगा यह सफ़र,
क्या करेगा,कैसा रहेगा यह जीवन का सफ़र ||

एक छूटा तो दूसरा मिलता गया,
उधड़े धागों को लगातार सिलता गया,
एक तरफ से संभलता था,
दूसरी से बिखरता चला गया,
क्यों जिन्दगी रहती है तितर बितर,
क्या करेगा,कैसा रहेगा यह जीवन का सफ़र ||





मेरी लाड़ी

मेरी लाड़ी
लग्गी नौकरी होया जवान,
बयाही ता मुन्डू,जित्या जहान |
लाड़ी मेरी बड्डी कपत्ती,
भयागा छोड़ें उट्ठी नी सकदी,
हाखीं रैंदियाँ त्योरी व्योरियाँ,
पता नी कुई ते लै आँदे एड़ी छोकरियाँ |
वाह वाह वाह वाह मेरी लाड़ी,
जानी ते प्यारी मेरी लाड़ी,
सारेयाँ ते छैल मेरी लाड़ी ||

रोटी बणाँदी खाँदी जानी,
चाह तिसा जो बणाणा नी भाँदी,
खूने पींदी,दमागे खाँदी,
कुछ बोलेआ ताँ पटगदी जाँदी,
वाह वाह वाह वाह मेरी लाड़ी,
जानी ते प्यारी मेरी लाड़ी,
सारेयाँ ते छैल मेरी लाड़ी ||

बजारे जाँदी खुश रैंदी,
घुमणे फिरने च मजे च रैंदी,
आराम करना बड्डा भाए,
बस उठणेओं कोई ना गलाए,
वाह वाह वाह वाह मेरी लाड़ी,
जानी ते प्यारी मेरी लाड़ी,
सारेयाँ ते छैल मेरी लाड़ी ||

साथी है मेरी,राह है मेरी,
मेरिआ माऊ दी सेवा करे भतेरी,
कराँदी पढ़ाई बच्चेयाँ दी,
चिंत्ता करे रिश्तेआँ दी|
दूजे कुसी जो जबाब नी दिन्दी,
पहाड़ी भी जाणदी,कन्ने जाणदी हिन्दी,
वाह वाह वाह वाह मेरी लाड़ी,
जानी ते प्यारी मेरी लाड़ी,
सारेयाँ ते छैल मेरी लाड़ी ||





शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2020

आसमां छू लेंगें

 आसमां छू लेंगें 


Photo by Nathan Cowley from Pexels

कभी सोचा आसमां छू लेंगे ,

कभी सोचा जहान जीत लेंगे ,

कभी सोचा आसमां छू लेंगे ,

कभी सोचा जहान जीत लेंगे ,

बस सोच सोच में ही रह गई ,

किसी का समय किसी की उम्र गुजर गई | 

दूसरे की झोली ज्यादा रही ,

अपनी कम ही रही ,

दिन रात की सोच में जिंदगी दफ़न सी रही ,

कुछ किया भी नहीं ,

जिंदगी जिया भी नहीं ,

कहीं समय ,उम्र खत्म हो गयी कहीं ||



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रविवार, 25 अक्तूबर 2020

ना जाने किस के लिए

Photo by Kaique Rocha from Pexels

ना जाने किस के लिए 

जमाने  भर से लड़ रहा ,
ना जाने किस के लिए | 
धूप  छाँव की परवाह ना कर रहा ,
ना जाने किस के लिए | 




Photo by Frederico Erthal from Pexels

मेरे होने से भी सब है ,
ना होने से भी सब होगा | 
हर इच्छा को दबा रहा ना जाने किस के लिए || 




Photo by Tom Swinnen from Pexels
कुछ खुशियाँ हैं मेरी ,
कुछ गम भी होंगे | 
खुशियाँ परे रख ,सब गम सह रहा ,
ना जाने किस के लिए | 



Photo by Artem Beliaikin from Pexels


कभी तो छाँव होगी ,
जहाँ धुप है अभी | 
किसी आशा में चल रहा,
ना जाने किस के लिए | 



बुधवार, 24 जून 2020

साहब खिलाफ है |

साहब खिलाफ है |
खिलाफ है साहब अगर,तो क्या है |
जीवन भर का नाम थोड़े ही है ||
जो पाएगा हमी से पाएगा |
है तो इन्सान ही, हैवान थोड़े ही है ||


कुछ पल काटने आया है, सुख के |
दिखता है, मगर परेशान थोड़े ही है ||
हवाओं में वो भी टिक नहीं पाएगा |
बादल है, ब्रहमाण्ड थोड़े ही है ||


जब लगेगी आग तो अपने ही पाओगे पास |
यह प्यार है, अधिकार थोड़े ही है ||
बहेंगे आँसू टपकेगा लहू |
उस के ना बहें,वो चट्टान थोड़े ही है ||


जुबान है बुरी, खानदान का प्रदर्शन है |
सब को बाँटा जाए, वह ज्ञान थोड़े ही है ||
कुँए से बाहर छटपटा जाएगा |
मछली है, मगर थोड़े ही है ||