सोमवार, 14 जून 2021

खीरगंगा कि कथा

 खीरगंगा  कि  कथा 





सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


इक बोले मैं हूँ पहला, दूजा बोले मैं हूँ पहला |
श्रेष्ठता कि बात पर, दोनों में संघर्ष जा ठहरा ||
बच्चों में संघर्ष कि बात,जा पहुँची मात पिता के पास |
कैसे रूके संघर्ष, ढूँढना पड़ेगा कुछ खास ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


तीनों लोकों का भ्रमण जो कर आएगा पहली बार |
वही होगा श्रेष्ठ वही होगा पूज्य पहली बार ||
कार्तिकेय जी उछलकर, जा बैठे मोर पर |
गणेश जी कैसे जीते उलझे पड़े इस सोच पर ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


एकदन्त को उपाय सूझा, मात-पिता को बुला भेजा |
तीनों लोक उन में जान, परिक्रमा कर माथा टेका ||
प्रसन्न हुए मात-पिता, श्रेष्ठता का वरदान मिला |
कार्तिकेय नें यह जान, कैलाश को त्याग दिया ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


हिमाचल में पार्वती घाटी,पड़ता एक स्थान |
कार्तिकेय जी ऱहें जहाँ, करें काम महान ||
पुत्र को प्रसन्न करने मात पार्वती धरती पर आईं |
पुत्र की ख़ातिर, यहीं पर खीर की गंगा बहाई ||
उचित स्थान जानकर शिवजी भी प्रकट हुए |
यहीं पर करूंगा ध्यान, गौरां से यह शब्द कहे ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


मणिकर्ण के पास खीरगंगा है यह स्थान |
कार्तिकेय और शिवा, जहाँ रहते एक समान ||
कलयुग को आता देख, परशुराम ने यह काम किया |
खीर पर लड़ेगी जनता, तो खीरगंगा को बदल दिया ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||


आज भी है गर्म पानी का झरना |
जहाँ उचित है स्नान करना ||
ध्यान का फल मिलेगा पूरा |
कोई काम नहीं रहेगा अधूरा ||


सब एक हैं, सब श्रेष्ठ हैं, उन से यह कौन कहे |
गणपति और कार्तिकेय, शिव के दो पुत्र हुए ||

ज्वालाजी कथा ,Maa Jawala JI

 ज्वालाजी कथा 


शिव का निरादर नी झेल सकी वो, 
हो गई हवन कुंड में सती वो |

लिए फिरे शिव जी  ,घवराई थी सृष्टी,
विष्णु जी सहाए,सृष्टी विनाश बचाए ||

जिह्वा गिरी जहाँ पर, अग्नि रूप भई वहाँ पर ||
एक गवाला गाय चराए,कोई कन्या दूध पी जाए ||

गवाले ने चमत्कार देखा, कन्या को होते ओझल देखा ||
गोरक्ष किले को धाए,राज भूमी को बात बताए ||

राज भूमी को बात पता थी,जिह्वा कि वो बात पता थी ||
पहाड़ी पर दौड़ के आए, ज्योति रूप में दर्शन पाए ||

मात ज्वाला भई सहाए,मंदिर का निर्माण कराए ||
पाँडव भी वनों में विचरते,, पहुँचे जब इस जगह पे ||

बहुत बड़ा मंदिर बनवाया, माँ सती का मान बढ़ाया ||
ज्वालामुखी नाम जगह का,जिला काँगड़ा पड़े यहाँ का||

ज्वाला रूप में दर्शन देती, भक्तों का दु:ख हर लेती ||
जो आए श्रद्धा संग, करे योग और ध्यान ||
सब इच्छा पूरी हो, मिले भोग और ज्ञान ||


ध्यानू भक्त ने अपना शीश माता ज्वाला को अर्पित किया,Dhyanu Bhagat

           ध्यानू भक्त ने अपना शीश माता ज्वाला  को 

                               अर्पित किया


मात ज्वाला भक्ति  तेरी, भक्ति करे भक्त ध्यानू |
भक्तों के संग दर्शन करने, चले भक्त कृपालू ||

बीच रास्ते संदेश पाए, अकबर का फरमान पाए |
कहाँ  चले भीड़ संग, क्या करना तुम को भाए ||

ध्यानू भक्त ने कह सुनाया, मात ज्वाला का महात्मय बताया |
अकबर यह सुन क्रोध में आया,ध्यानू के घोड़े को मार गिराया|


भक्ति तेरी सच्ची है, सच्ची है गर बात |
घोड़े को जीवित करेगी, गर ज्वाला मैया तेरे साथ ||


एक माह रखना राजा, मात करेगी पूरण काजा |
माता शक्ति को, तू भी मानेगा राजा ||

भक्त ध्यानू ध्यान करे, भजन करे दिन रात |
माता कि प्रसन्नता कि ख़ातिर, सिर दिया वार ||

मात ज्वाला प्रसन्न भई, दिया जीवन दान |
घोड़े को भी जीवित किया,दिया महाज्ञान ||


जो आए मंदिर में, आए माता के दरबार |
दु़:ख सारे दूर हों, सुखी रहे संसार ||

अकबर और माता ज्वाला कि कथा , Akbar and Mata Jawalaji

               अकबर और माता ज्वाला कि कथा |



वाह रे प्यार तेरा, माँ ज्वालाजी के साथ |
मरे को जीवन दिया, लगा दी नैया पार ||


अकबर राजे ने, जब देखा, जब देखा चमत्कार |
चल पड़ा सेना लेकर, ज्वालजी के पास ||
ज्वालाएँ जलती देख, परीक्षा लेने कि ठानी |
जल की धाराएँ मंदिर में बहा दीं ||


साथ मिले जिसे,मिले माँ का साथ |
मरे को जीवन दिया, लगा दी नैया पार ||


कैसे तेरे भक्त हैं, कैसा है इम्तिहान |
सुर हो या असुर, सब हैं एक समान ||
पानी में ज्वालाएँ जलीं, अकबर का मान घटाया |
सवा मन सोने का छत्र, ज्वाला माँ के चढ़ाया ||


जो भजे माँ को, करे याद दिन , रात |
मरे को जीवन दिया, लगा दी नैया पार ||


माँ को नहीं है लोभ ना चाह तेरे माल की |
चाह है भक्ति की और भक्त के प्यार की ||
अकबर के मान था, ना था माँ का सम्मान |
सोने को बदलकर,दूर किया अभिमान ||


आओ भक्ति लेकर, माँ को करो प्रणाम |
अपनी धन दौलत से, करो गरीबों में दान ||

माता ज्वाला का इंतज़ार ,Mata Jawala Ji

 माता ज्वाला का इंतज़ार 


नो ज्वालाएँ माता तेरी,जलें दिन और रात |
भक्तों के दु:ख हरे, सादा रहे भक्तों के साथ ||
गुरू गोरखनाथ जी करें, करें पूरी सब आस |
भक्ति करने थे बैठे, ज्वाला मंदिर के पास ||


भोजन पर बुलाने का माता ने किया विचार |
बड़ी कोशिशों से जिसे गोरखनाथ जी ने किया स्वीकार ||
खिचड़ी ही खाऊँगा माँ, लेकर आता हूँ कुछ चावल |
पानी उबालकर रखें, खाऊँगा लौटकर ||


उबाला जल, ज्योत कि महिमा है कैसी |
लौटे नहीं गोरखनाथ जी,माता प्रतीक्षा में बैठी ||
गोरख डिब्बी है वह जगह, पानी जहाँ है उबल रहा |
छूने पर होता ठंडा प्रतीत,महिमा बखान कर रहा|

बाबा बालक नाथ जी,Baba Balak Nath Ji

 बाबा बालक नाथ जी


कह रहा हूँ  तेरी कहानी |
हो सिद्धों के सिरमौर |
सतयुग में स्कन्ध, त्रेता में कौल
और द्वापर में कहे गए महाकौल ||

महाकौल ने मन में ठानी,चले कैलाश कि ओर |
पथ में इक बृद्धा मिली, चले बाबा किस ओर |
चला हूँ शिव के दर्शन करने, ठानी बात यही इक मन में|
निलकण्ठ को प्रसन्न करूँगा,कर चुका यह 
प्रण मैं |


मानसरोवर के किनारे, कर तपस्या, वो सहाय |
मात पार्वती दर्शन देंगी, पूछना शिव मिलन 
के उपाय |

बाबा जी लगन में बैठे, बैठे ध्यान लगाए |
पार्वती जी का दर्शन पाए, मिला ईश मिलन 
का उपाय |


थी प्रतिज्ञा अटल, शिव मिलन में हुए सफल |
चिर आयु का वरदान पाए, पाया अमरता का 
फल |
सिद्धों में से एक होंगे, रहेंगे तरूण स्वरूप में |
कलयुग में भी पूजा होगी, होंगे बालक रूप में |

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रविवार, 6 जून 2021

काकू कि घर वापसी | कड़वी बात




काकू कि घर वापसी


गाँव का नाम साबरि |कहानी शुरू होती है गाँव के प्रधान ,प्रधान जी का अनीता जी से कुछ झगड़ा चल रहा था |अनीता जी ने प्रधान जी को गाली गलौच कर दिया |अब प्रधान जी कि रातों कि नींद हराम |खाक पंचायत को बुलाया गया ,अनीता जी को कुछ इस तरह से पेश किया गया जैसे सारे गाँव को उस ने गाली दी हो ,गाँव तो गँवार था ही प्रधान जी कि बातों में आ गया और अनीता जी को गाँव से बाहर कर दिया |


मेरा दोस्त ने यह कह कहानी सुनाते सुनाते कहा कि अनीता जी धन धान्य से भरपूर थीं |

Photo by Andrea Piacquadio from Pexels

हँसी आती है गाँव के इस फैंसले से ,जिस के पास सब कुछ था उसे अलग कर के क्या हो जाएगा |अरे सजा ही देनी थी तो कुछ इस तरह से देते कि उसे कुछ तो बुरा लगता |


जिस बात के लिए अनीता जी ने प्रधान को दबंगई दिखाई थी वो तो उस ने अलग रह के भी पूरी कर ही ली |


अनीता को अलग किया गया तो इस का फर्क उसे तो नहीं पड़ा पर दो परिवार इस के कारण कठिनाई में रहे |


पहला परिवार भरत जी का, जो हर पल हर किसी कि सहायता करने के लिए खड़ा रहता था | किसी बिमारी के चलते भरत जी का निधन हो गया | सारा गाँव उन के निधन में शामिल हुआ | अनीता जी भी ,भरत के परिवार को ढाँढस बँधाने आईं |प्रधान जी ने जब अनीता जी को देखा तो वह आग बबूला हो उठा ,भरत जी कि पत्नि को ,अनीता जी को बाहर निकालने के लिए कहा गया | 


भरत कि पत्नि ने अनिता को बाहर  ना निकालने का फैंसला लिया ,इस पर मौत में शामिल सारा गाँव गोत्र के नाम पर अलग बैठ गया और भरत के परिवार को इस मुश्किल घड़ी में अलग कर दिया | आज तक यह गाँव इस पातक से मुक्त नहीं हुआ है,क्योंकि उन के लिए बनाया खाना फैंका गया |

Photo by mali maeder from Pexels

भेड़ों का इक गाँव,इंसानियत का नहीं था मोल |

जिस का एहसान था ,मरण पर उसके बजा रहे थे ढ़ोल ||


दूसरा परिवार जो आज तक उठ नहीं पाया |गरीब काकू जी का परिवार |एक बार अनीता जी के यहाँ सामूहिक भोज का कार्यक्रम था |गरीब जानकर अनीता जी ने काकू जी के परिवार के भी आमंत्रित किया |काकू जी कि माँ और काकू जी भोज में शामिल हुए |


अब प्रधान जी को यह बात पता चली तो खाक पंचायत बुलाकर उस गरीब परिवार को भी बाहर निकाल दिया गया |

अब काकू जी कि कहीं कोई मदद नहीं कर रहा था |

Photo by lalesh aldarwish from Pexels

हद तो तब हो गई जब काकू जी के ही परिवार में सामूहिक भोज कार्यक्रम रखा गया और उसे गाँव से अलग होने पर नहीं बुलाया गया |इस बात से काकू अन्दर तक हिल गया और सारी रात रोता रहा |


भरत जी के परिवार ने काकू जी को समझाया कि सारे गाँव से माफी माँग ले |वह गरीब क्या करता ,उस ने सारे गाँव से माफी माँगी ,गाँव ने माफ भी कर दिया |यह बात शायद प्रधान के कानों तक नहीं पहुँची कि गाँव ने काकू जी को वापस मिला लिया है |


एक दिन काकू जी कि माँ गाँव के किसी घर से मिट्टी ला रही थी ,प्रधान ने उसे देख लिया तो आगबबूला होकर बोला "ये गाँव से अलग हैं  यहाँ क्या कर रहे हैं ,जाओ यहाँ से " | यह सुनकर काकू जी से रहा नहीं गया और उस ने गाँव छोड़ने का फैंसला कर के दिल्ली जा कर काम करना अच्छा समझा|


वारहवीं पढ़ा बच्चा दिल्ली में क्या करता ,भरत के परिवार ने काकू जी को बहुत समझाया ,कि ग्रेजुएशन हम करवा देते हैं उस के बाद शहर जाना | पर काकू फैंसला कर चुका था वह गाँव छोड़कर दिल्ली चला गया |


आज उसे कई बर्ष हो गए हैं ,माँ बूढ़ी है,दिखना बन्द हो गया है पर बेटे से मिलन कि आस लगी रहती है |

Photo by Bhavyata Nimavat from Pexels

दोस्तों दो परिवारों के बीच का झगड़ा,तीसरे को ले डूबा है |काकू दिल्ली में है,कैसा है पता नहीं पर उस की माँ बहुत दिनों से बेटे कि बाट जोह रही है |


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शनिवार, 5 जून 2021

Jeevan Mantra | जीवन मंत्र |आज का विचार | Today's Thought

 Jeevan Mantra | जीवन मंत्र


जानीयात्प्रेषणेभृत्यान्बान्धवान्व्यसनागमे,मित्रंचापत्तिकालेतुभार्यांचविभवक्षये |


सेवक कि काम पर लगाने से,बान्धवों कि दुःख में,मित्र कि विपत्ति में और सम्पदा का नाश होने पर पत्नी कि परीक्षा होती है|


Servants while employing, relatives in sorrows,friends in misfortune and on destruction of wealth wife is tempted.


Today's Thought | आज. का विचार

किसी भी तरह कि मन्नत माँगने पर, अपनी शक्तिनुसार पूरी करनी चाहिए ना कि दूसरों के दान से ,क्योंकि इस कार्य के लिए प्राप्त दान का भार उतर नहीं सकता और सारा फल दान देने वाला ले जाता है|


Any kind of vow should be fulfilled according to own power  and not with the donation of others, because the burden of the donation received for this work cannot come off and the donor takes all the fruit.


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शुक्रवार, 21 मई 2021

देश प्रेम कविता |Poem on love for country

 

सोया शेर


देश प्रेम है मुझ में,देश से है प्यार |

तिरछी नज़र देखा भी,दूँगा सिर उखाड़ ||


किस का फैसला है ,किस का है अधिकार,

आश्रय दिया जिसे ,कर रहा प्रहार |

सोया  पड़ा शेर है,गीदड़ कर रहे वार,

झुँड बनाए बैठे हैं ,बने पड़े हैं काल ||


देश प्रेम है मुझ में,देश से है प्यार |

तिरछी नज़र देखा भी,दूँगा सिर उखाड़ ||


गुड्डे गुड्डियाँ सब तोड़ दिए ,

बर्बाद किया घर बार |

जिस घर में खेले थे ,

उजाड़ दिया संसार ||


देश प्रेम है मुझ में,देश से है प्यार |

तिरछी नज़र देखा भी,दूँगा सिर उखाड़ ||


एक शेर को फर्क नहीं ,जब पड़ता दूजे शेर का,

तब कुत्ते घेर लेते ,शेर का भी रास्ता |

बंद रखता जब आँखें,नहीं रखता जब वास्ता,

जिम्मेदार होता है वह ,हर तरह के नाश का ||


देश प्रेम है मुझ में,देश से है प्यार |

तिरछी नज़र देखा भी,दूँगा सिर उखाड़ ||


अकेला ही झंडा उठा ,दे धरती में गाड़,

पंजों को तेज़ कर,इक बार तो दे दहाड़ |

मृत्यू तो है ही ,फिर किस का है इंतज़ार,

शेर को जगा अब,शत्रू कि छाती फाड़ |


देश प्रेम है मुझ में,देश से है प्यार |

तिरछी नज़र देखा भी,दूँगा सिर उखाड़ ||


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शनिवार, 8 मई 2021

आज का विचार | Aaj ka vichaar

जीवन मंत्र संस्कृत में

मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टस्त्रीभरणेनच ,
दु:खितै:संप्रयोगेण पंडितोप्यवसीदति |
                           (चाणक्यनीतिदर्पण:)

जीवन मंत्र हिन्दी में


मूर्ख शिष्य को उपदेश देने से ,दुष्ट स्त्री के भरण पोषण से, दु:खि इंसान के साथ व्यव्हार करने से बुद्धिमान भी दु:ख पाता है |

Life Mantra in English

By teaching a foolish disciple, by nurturing an evil woman, By dealing with a sorrowful person, the wise person also gets sorrow.




आज का विचार हिन्दी में

किसी से बुरा व्यवहार करने से पहले खुद के उस के स्थान पर रख के देखो ,अपने आप शाँत हो जाओगे ||

Today's Thought in English

Put yourself in his place before you misbehave with someone and see yourself become peaceful.

शनिवार, 1 मई 2021

वायरल कोरोना कविता |कोरोना का प्रभाव|Viral Corona Kavita | Effects of Corona

 वायरल कोरोना कविता |कोरोना का प्रभाव


🐾भूख बढ़ गई पैसे कि,रोग का हो रहा व्यापार ,

दया भावना रही नहीं,मानसिक्ता हुई पड़ी बिमार |

जीवन दाता माना तुझको ,तुझको माना है भगवान,

अंधा बहरा हुआ पड़ा है,है कैसा तू इंसान||🐾


Photo by Karolina Grabowska from Pexels


🐛हवा बिक रही,पानी बिक रहा ,

नहीं है पैसा,तो मुर्दा भी बिक रहा |

छीन लिए मूर्दे के कंगन,छीन ली किसी की साँसें ,

तड़फ रहा है कोई,धूमिल पड़ी किसी कि बाँछें ||🐛



🦃भाई किसी का,बहन किसी की ,

बाप किसी का ,माँ किसी कि |

मान किसी का ,जान किसी कि,

दिन किसी का रात किसी कि |

हाथ जोड़े खड़ा बाप ,रो रही है माँ किसी कि ,

तेरा तो कोई नहीं,क्यों सुने फर्याद किसी कि ||🦃



💰गुर्दे बेचे तीन ,लीवर बेचा पाँच लाख,

लाखों में बेचा दिल,जाने कैसी तेरी साख|

कफन बेचा ,लकड़ी बेची,बेच दिया अंतिम संस्कार |

क्या सोच रहा है तू ,होगा इक दिन तू भी खाक ||💰


अन्य कवितायें 



जीवन मंत्र | आज का विचार |Jeevan Mantra| Today's Thought

 जीवन मंत्र | आज का विचार |Jeevan Mantra| Today's Thought


🐭जीवन मंत्र🐭


नास्ति मायासम: पाशो नास्ति योगात्परं बलम् |

नास्तिज्ञानात्परो बन्धुर्नाहड्.कारात् परो रिपु: || 

(घेरण्ड संहिता )



Nasti mayasamah pasho nasti yogataram balam,

Nastigayanatparo bandhurnahankarat paro ripu.


माया (मोह) से बड़ा कोई जाल (फंदा ) नहीं ,योग से प्राप्त बल से बड़ा कोई बल नहीं |ज्ञान से बड़ा कोई बंधू नहीं ,और अहंकार से बड़ा कोई दुश्मन नहीं |


There is no net (trap) greater than maya (attachment), no force greater than the force derived from yoga. There is no friend than knowledge, and no enemy greater than ego.


Photo by Valeria Ushakova from Pexels


🐥आज का विचार🐥


जहाँ बिमारी घर कर जाती है ,वहाँ समृद्धि नहीं हो सकती |

जिस घर में योग है ,वहाँ बिमारी नहीं रह सकती ||


Where there is sickness, there cannot be prosperity. In the house where there is yoga, there cannot be sickness.


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गुरुवार, 8 अप्रैल 2021

जीवन मंत्र | आज का विचार | jeevan mantra | aaj ka vichar

 जीवन मंत्र | Jeevan Mantra

Photo by laura parenti from Pexels


यदा संहरतै चायं कूर्मोsड़्गानीव सर्वशः |

इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता|

हिन्दी में अनुवाद

जिस तरह से कछुआ अपने अंगों को पूरी तरह से समेट लेता है ,उसी तरह से जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों को काबू में रखता है वही प्रज्ञा सम्पन्न होता है |

Translation into English

The way a tortoise controls its organs completely, in the same way the  person who keeps his senses in control have great knowledge.


आज़ का विचार | Aaj ka vichaar


मन वचन अथवा शरीर से कोई दुःख भी पहुँचाए ,तो उस पर क्रोध और वैर न करना क्षमा है |


Translation into English

If anyone hurt you by anyway whether by heart,speech or physically, then it is pardon not to have anger and hatred on it.


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