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Tuesday, July 16, 2019

वक्त हमें हर वक्त कहता है ,जरा सब्र रख रे बंदे !!

वक्त हमें हर वक्त कहता है ,जरा सब्र रख रे बंदे !! 

राम राम दोस्तों !! 
मैं वक्त हूँ ज़रा कदर कर मेरी ,
वक्त पर ही किस्मत हूँ तेरी !!

दोस्तों आज हमारे एक दोस्त ने एक सन्देश भेजा जिसे मैं आप लोगों के साथ Share करने से रुक नहीं पाई !! आप भी पढ़ें ,कुछ सीख छिपी है इस में !!

अच्छा लगे तो Like ,Comment और शेयर करना ना भूलें !!
Photo by rawpixel.com from Pexels
कल क्रिकेट का महाकुम्भ समाप्त हो गया , मगर हर किसी को लगा ,ये क्या हो गया ???



ना हारने वाला हारा ना जीतने वाला जीता...  ना समझदार समझा ना मुर्ख.........जिस देश ने क्रिकेट को जन्म दिया वो आज तक इस खिताब के लिए तरसता रहा , दुनिया की लानतें  झेलता रहा और जब हाथ में पहली बार आया तो सभी ने पूछा  कितने रन  /कितने विकेट से जीता ??  कोइ जबाब नहीं ??

अब इसे मेहनत की जीत कहें या मुक्कदर की..... या फिर .......????? सारे प्रपंच करने के बाद भी बच्चों बच्चों के खेल की तरह से फैसला। किसी को समझ में नहीं आया कि कोई  हारा भी है क्या ??न्यूजीलैंड को ढाँढस बँधायें या इंग्लैंड को बधाई दें।   


दोस्तों जीवन कुदरत का अनमोल तोहफ़ा है।  इसमें मिलने वाली हर जीत-हार ,खुशी -गम में मेहनत और मुक्कदर दोनों का मेल है। 99% मेहनत पर 1% भाग्य कैसे चोट मारता है यह बात न्यूजीलैंड के साथ साथ सच्चे खेल प्रेमियों को अगले चार साल तक खटकती रहेगी ??

जीवन है तो झंझावात झेलने होंगे ......

Photo by rawpixel.com from Pexels

दर्द -ए -दास्तां के लिए ही तो इंसा को बनाया गया है ,
वरना फरिस्ते क्या काम थे ,
लेकिन वक्त हमें हर वक्त कहता है , ज़रा सब्र रख रे बन्दे  ,
मैं जैसा भी हूँ वक्त पर गुजर ही जाऊँगा...... हो अच्छा या बुरा ! 

हो सकता है किसी को मेरी बात कड़वी लगे ,दोस्तों आप किसी भी टीम के समर्थन में हों पर एक बार सोच के जरूर देखें !! यह आप के साथ हर रोज घट  रहा है !

Tuesday, July 9, 2019

क्या हम बच्चों को बिगाड़ रहे हैं ! Are we spoiling our the children!

Photo by Guduru Ajay bhargav from Pexels
दोस्तों देर से ब्लॉग के लिए माफ़ करें  मैं कुछ मुसीबत से गुजर रही हूँ जिस के कारण  मैं लिख नहीं पा रही थी ! आज कुछ ऐसा घटा जिसे आप से share करे बिना नहीं रहा गया  ! दोस्तों आज का लेख है क्या हम बच्चों को बिगाड़ रहे हैं, मतलब तो आप जान ही गए होंगे ! 

दोस्तों भारत दुनिया में दूसरा सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश है , यहाँ की जनसंख्या तो बढ़ रही है पर उस के मुताबिक़ साधन नहीं , जिस के चलते आम आदमी को अपनी कुछ जरूरी जरूरतें  भी पूरी करने में कई बार कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है !

Photo by Negative Space from Pexels
लेकिन एक बात सोचने की है भारत में कोई  गरीब हो या अमीर जब उसके घर में कोई  बच्चा जन्म लेता है तो बहुत खुशियाँ  मनाई जाती हैं , पार्टियाँ ,सामूहिक भोज , जगराते और पता नहीं क्या क्या ! चलो यह तो किसी का भी निजी मामला है !

भारत में बच्चों  की बहुत फ़िक्र करते हैं ! मिट्टी  में मत खेलो,बाहर मत जाओ ,मेरा प्यारा बच्चा,किस ने मारा ने मारा मेरे बच्चे को, मैं  अपने बच्चे को दूर नहीं रख सकती और पता नहीं क्या क्या ! दोस्तों क्या हम बच्चों  की ज्यादा ही फ़िक्र नहीं करते,क्या हम बच्चों को बिगाड़ नहीं रहे हैं ! 

ये सब बातें  मेरे दिमाग में आने का कारण है  आज की घटना ! आज मैं अपने बच्चे को स्कूटी पे  बिठाकर  बाजार की तरफ जा रही थी ! बाजार की तरफ जाते जाते मेरा ध्यान सड़क के किनारे खेल रहे बच्चों  की तरफ गया उन्हें ना तो ट्रेफिक का डर , ना कोई उन का ध्यान रखने बाला, मुझे बड़ी फ़िक्र हो रही थी उनकी , मैं  उनके बारे में सोचते सोचते चली जा रही थी !मैं  लगभग 40-45  की स्पीड़  में चली जा रही थी  तभी मेरा ध्यान एक बाईक कि आवाज़ ने तोड़ा , मैं  घवरा गयी ! मैंने स्कूटी को जैसे तैसे संभाला और अपने रास्ते हो ली , आगे रास्ता सीधा था तो मैंने भी अपनी स्कूटी की गति बढ़ाई , तभी वो बाईक वाले कहीं  पीछे से तेजी से आये और मेरे आगे आकर एकदम ब्रेक लगा दी , अब मैं  भी स्पीड़  में थी , पर भगवान का शुक्र है मैं  स्कूटी को संभाल पाई और ब्रेक लगा पाई ! 

मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था , पर ज्यादा ना बोलते हुए मैंने उन्हें बस इतना बोला , "बेटा ध्यान से ड्राईविंग करो , आप के पीछे और भी लोग हो सकते हैं " मेरा इतना कहना था की वो लड़के गुस्से से लाल हो गए ,जैसे उन की अम्मा को मैंने थप्पड़ मार दिया हो और पता है क्या बोले " चल चल अपने रास्ते जा , साइड में लेकर आगे निकल जाओ ,बहुत जगह है "!

उन की यह बात सुनकर मेरी आँखों से आंसू निकल आये , बहुत बेइज्जती महसूस हो रही थी !मेरा सिर घूम रहा था और मैं स्कूटी को चला नहीं पा रही थी ! मै बिना कुछ खरीदे हुए घर लौट आई !

Photo by Chinmay Singh from Pexels
अब मेरे दिमाग में वो दोनों तस्वीरें लौट-लौट कर आ रहीं  थी, एक तरफ सुविधाओं से रहित बच्चे और दूसरी तरफ वो बच्चे जिन के माता पिता उन का बहुत ख्याल रखते हैं !अब आप लोग ही उत्तर दीजिये क्या हम बच्चों को बिगाड़ रहे हैं?
मेरा कहना तो इतना ही है बच्चों  की उतनी ही जरूरतें  पूरी करो की वे बिगड़ें  ना , उन्हें आदमियों में रहना सिखायें  , उन्हें जीवन के उसूल सिखाएं , खाने ,पहनने,चलने और दूसरों से व्यवहार का तरीका सिखाएँ ,सुबह जल्दी उठना , स्कूल का काम पूरा करना ,पढ़ाई के महत्त्व के साथ-साथ कमाई का महत्त्व भी उन्हें सिखाएं !वरना कहीं ऐसा ना हो, परिणाम आप को ही भुगतना पड़ जाए !

पर हमारे पास तो पैसा है , तुम कौन होती हो सिखाने वाली, हमारे बच्चे हैं , हम तो इन की हर जरूरत पूरी करेंगे , समय आने पर खुद ही सीख लेंगे ये सब बातें  आप लोगों में  से अधिकतर के मन में आ रहीं  होंगीं ! 

इसमें आप का घाटा मेरा कुछ नहीं जाता !

जो मन में आये Comment जरूर करें !मेरी कोई  बात बुरी लगी हो तो माफ़ करें पर एक बार सोचें जरूर !इसे Share जरूर करें ताकि यह बात उस बाईक वाले तक तो पहुँच ही जाए !

धन्यवाद 

Saturday, June 15, 2019

Family Problems and Solutions, अब क्य करे आदमी जब अपने ही गलत हो बैठे हों ??

हर मायूस  के चेहरे  पर मुस्कुराहट भर देना ,कारोबार है अपना ,दिलों  का दर्द बाँट लेना बस यही रोज़गार  है अपना !

अब  क्या करे एक आदमी जब अपने ही ग़लत  हो बैठे हों  !


Photo by Pixabay from Pexels

दोस्तों मैंने यह ब्लॉग, कमाने के लिहाज से नहीं ,अपितु  आप सभी के सामने वो सभी समस्याएँ रखने के लिए शुरू किया है जिस से आप में से कोइ गुजर चूका हो या तो कभी गुजर सकता हो ! इन समस्याओं  के हल , Flipkart ,Amazon या Internet पर शायद ही कहीं मिलें , हमारी सोच में सुधार ही इन सभी समस्याओं  का सुधार है हमारी ही सोच में !  

दोस्तों हम सब की आदत है अपनी जिम्मेवारियों से पीछा छुड़ा लेना ! हमारे सामने किसी का बलात्कार हो रहा हो या कोइ दुर्घटना क शिकार हो गया हो हम पुलिस , प्रशासन और दूसरों  को दोष दे देते हैं  , खुद कुछ नहीं करेंगे पर उस पीड़ित की वीडिओ बनाकर और फोटो खींचकर सोशल मीडिआ में डाल  देंगे और सवाल पूछेंगे कौन है इस का जिम्मेवार ??

कैसा  हो गया है आदमी ! कैसी सोच हो गयी है ! 

Photo by Chris Mitchell from Pexels
अपनी आशाओं  की खातिर तू क्या कर रहा है ,इतना जो जीएगा नहीं जितना तू मर रहा है !


राक्षस हो गए हैं  हम !



सभी युगो  में शायद बुरे को पहचान लेना आसान था पर कलयुग में तो सभी राक्षस हो चुके हैं  !

मेरा एक दोस्त है जो एक Multinational Company में काम करता है ! उस की नौकरी पूरी मजेदार है , नौकरी ऐसी जिसे सब चाहें  ! खुशी परिवार , दो बच्चे  और सब कुछ है उस के पास ! हर किसी की चिंता करना दूसरों  की मदद करना उसे अच्छा लगता है ! 

अपने बड़े भाई के लड़के  को उस ने अपनी company द्वारा खोले school में नौकरी दिलवाई और गाँव में जगदीश की बेटी की शादी में उसने पूरा खर्च उठाया !

कल मैं  उसके घर गया था , बहुत आवभगत की मेरी उन्होंने , भाभी ने मेरी पसंद की सब्जी बनाई थी , पूरा दिन कब बीत गया पता ही नहीं चला ! 

उस की 5  साल की बेटी है जो उसी स्कूल में पढ़ती है जो उस की company ने खोला है , दो लाख रूपये फीस दी है उसने वहाँ  !

उस का 2 साल   बेटा तो मेरे पास आया भी पर बेटी मुझ से दूर दूर ही रह रही थी , शायद आज स्कूल नहीं भेजा था उसे इसी सोच से की अंकल पूछेंगे वो मेरे पास नहीं आ रही थी ! 

शाम को मैं और दोस्त दोनों चाय पीने बागीचे में बैठे , बातों  बातों  में मैंने उसे कहा की बच्चों  की चिंता करो पर उन पर इतना बोझ मत डालो की अपने को ही भूल जाएं  ! आज तेरी बची मेरे साथ खेलने  नहीं आई ! 

राजू (मेरा दोस्त ) बोला यार तुम्हे यद् है वि लड़का जिसे मैंने नौकरी लगवाई थी , आज उसका Accident हो गया ! तभी से बच्ची परेशान है वह हमारे घर आता था और बच्चे भी उस के साथ घुल मिल गए थे , वह आज हमारे ही घर आते हुए दुर्घटना का शिकार हो गया ,सर में गहरी चोट है और एक टांग की हड्डी टूट गयी है !बचने की उम्मीद काम है ! 

बहुत दुःख की बात है मैं बोला ! इतना सुनते ही राजू जोर जोर से रोने लग गाया ! मैं समझ नहीं पाया उस के रोने को , पर मेरा दोस्त है ही ऐसा दूसरों  के दुःख को अपना दुःख समझ लेता है !

मैं सोच में था इतने में राजू बोलने लगा सब मेरी गलती है अगर मैं समय से
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उसे हॉस्पिटल ले जाता तो आज यह ना सुनना पड़ता ! 


मैं  और बेटी वहीं  से गुजर रहे थे जहां वह अचेत पड़ा था ! लोग उस के चारों  और खड़े थे कोई  फोटो खींच रहा था कोइ विडीओ बना रहा था , ना तो किसी ने Ambulance को बुलाया ना ही Police को ! मैंने भी उन लोगों  की तरह ही किया , सोचा कौन ले पंगा , कौन ले Tension . मैंने बच्ची  का सर अपने कंधे के पीछे किया और  बोला  बेटा  कुछ नहीं हुआ और वहां से वापस चला आया ,घर आकर जब पता चला की वो तो मेरा रिश्तेदार था तो बड़ी ग्लानी हुई !

मैंने आज जाना हम लोग कैसे हो गए हैं !सोच तक मर गयी है हमारी !धिक्कार है ऐसी जिंदगी पर !जब अपने को दर्द होता है तो पता चलता है !मैं  उसे देखने और उस का हाल पूछने तक नहीं जा पा रहा ! क्या बोलूंगा उसे की मैंने तुम्हे पड़े हुए देखा था और मुँह चुराकर आ गया !

दोस्तों यही हम सब के साथ भी है !दिन में हम कई समाचार ऐसे ही पाते हैं !कोई  किसी की मदद नहीं करता ! पड़ा है तो पड़ा रहने दो पुलिस देख लेगी ! अरे तुम कैसे इंसान हो ,तुम भी किसी जल्लाद से कम नहीं हो !जब भगवान् अपने पास बुलाएगा तो यही चीजें  याद करोगे !यही मौका होता है दोस्तों जब कोइ दिल से दुआ देता है !जैसे  तुम दूसरे के साथ करोगे भगवान् न करे कल आप के साथ भी वही हो !

हर किसी का कोई  ना  कोई  है हर किसी का कोई  न कोई  इन्तजार कर रहा है !

दोस्तों अगर कुछ सीखा हो तो comment  जरूर करें ,और share करना ना भूले ताकि किसी के हाथ तो उठें सहायता के लिए !

धन्यवाद !!!!!

बात तीखी लगी हो तो माफ़ करें !बाकी दुनियाँ  में झन्डुओं  की कमी नहीं तुम भी उन में शामिल हो जाओ !!!!

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Saturday, June 8, 2019

Family problems and solutions,किस बात कि अकड़,अकड़ता तो मुर्दा है ,Be Happy and make Happy

जी लो ,क्या पता यह पल दुबारा आए न आए 

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Restoration अपने जीवन को बदलो ,खुश रहो |कहते हैं बचपन लौट के नहीं आता |क्यों हम बचपन को याद करते हैं |हुए पच्चपन याद आया बचपन |

दोस्तों हमें बचपन क्यों याद आता है ? क्यों हम सोचते हैं कि काश बचपन लौट आता ? बचपन ही एक ऐसी अवस्था है ,जीस में हमें कीसी से लेना देना नहीं होता ,किसी से इर्ष्या नहीं कोई द्वेश नहीं ,खुद ही लड़ो और खुद ही मन जाओ |इक पल लड़ो दूजे पल दोस्ती |

अगर हम बचपन को याद करते हैं तो इस का मतलब है कि हमारे दिल के किसी कोने में प्यार तो है ,कोई कोना ऐसा तो है जो बिना इर्ष्या और द्वेश के रहना चाहता है |

पर फिर भी हम भटके हुए रहते हैं ,पैसा कमाना है ,दुनिया को दिखाना है |चारों तरफ से हम अपने को चिंताओं से घेरे बैठे हैं |

कोई दूसरे कि तरक्की से जल रहा है तो कोई दूसरे को  नीचा दिखा-दिखा कर चिंताग्रसित है , कोई अपने मन की नहीं कर पा रहा क्योंकि वह दूसरों के बारे में सोच रहा है कि दुनिया क्या बोलेगी |

क्या होगा अगर आप ने किसी को नीचा दिखा दिया,उस का कुछ नहीं गया |गया तो आपका, क्योंकि आप हमेशा उस पल के बारे में सोचते रहे ,जिस पल आप उसे नीचा दिखा सको |

दोस्तों जब आप पत्थर ऊपर फैंकते हैं तो वह बापस खुद पर ही आता है | हमारी बिमारियाँ हमारे हि कर्मों का नतिजा है |चिंता सदा चिता समान |

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तो दोस्तो मत भूलो बचपन ,जो दिल करना चाहता है करो,दुनिया कि चिंता मत करो ,हर पल मस्ती में जिओ | किसी कि परवाह मत करो | जाओ घूमो फिरो ,अंत मे ऐसा ना हो कि पछतावा ही रहे |तुम अमीर हो तो  खुद के लिए हो ,हो गरीब अगर तो अपनी सोच से  हो |

पैसै कमाकर या बचाकर क्या करोगे |बच्चे अच्छे हुए तो खुद कमा लेंगे और बुरे हुए तो सब गवा देंगे | तो छोड़ो चिंता खुले में साँस लेकर देखो |

मैने 30 साल के बुड्ढे और 90 साल के जवान देखे हैं |क्या पता भगवान दूसरा मौका दे ना दे |यहाँ कोई टिक के नहीं रह सकता |

इक दिन मरना जरूर है ,ऐसा जिओ कि लोग बोलें वाह क्या जी कर गया है ,क्या जिन्दगी थी बन्दे कि |

तो दोस्तो क्या सोच रहे हो ,निकलो बाहर, गहरी साँस लो ,तिल तिल मरो मत ,जी भर के जिओ |सभी को माफ कर दो और माफी माँग लो |

बात कड़वी लगी हो तो माफ करें |

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Thursday, May 30, 2019

Family Problems and solutions,Old age homes,हमें बूढ़े माँ बाप की कोई जरूरत नहीं ,उन्हें बृद्धाश्रम भेज दो

Family Problems and solutions
हमें बूढ़े माँ  बाप की कोई  जरूरत नहीं ,उन्हें बृद्धाश्रम भेज दो

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कल मैं सुबह सुबह योग कर रहा था, इस समय मैं केवल योग ही करता हूँ किसी का बात करना मुझे अच्छा नहीं लगता ! तभी मुझे मेरे दोस्त राजन के भाई राकेश का कॉल  आया मैं कॉल  उठाना  नहीं चाह  रहा था पर वह बार बार कॉल किये जा रहा था , मैंने दिल मसोस के कॉल  उठाई और गुस्से से उस से कारण पूछा , तो दूसरी तरफ से जबाब आया माफ़ करना भाई पर जल्दी से हमारे घर पहुंचो आपकी जरूरत है मैंने उस से चिंता का कारण पुछा तो वह बस यह बोलै भईया जल्दी से घर पहुंचो बड़े भाई भाभी को तलाक दे रहे हैं ! 

मेरा दोस्त राजन जिला अधिकारी है ! वह बचपन से ही बहुत ही लायक विद्यार्थी था ,उस की माँ ने पिता के ना होते हुए, उसे  पढ़ाया ! राकेश की बात सुनकर मैं चौक गया था ऐसा क्या हो गया ,राजन का परिवार तो बहुत खुश था सब  ठीक चल रहा था अब क्या हो गया ! मैंने आव देखा ना ताव बस उस के घर की तरफ दौड़ चला !

Photo by Kat Jayne from Pexels
राजन के घर पहुँच कर देखा की वह सोफे के कोने में आँखों में आंसू लिए बैठा है उस की 10  बर्ष की बेटी उदास सी उस के पास खड़ी  है  मैंने राजन के पास  जाकर पुछा ________

 दोस्त क्या बात है यहाँ क्या हो रहा है ,तेरे खुशहाल परिवार में ये उदासी क्यों।  यह सुनते ही वह भभक कर रो पड़ा और बोला  !

मैं माँ को बृद्धाश्रम छोड़ आया हूँ।  जिस माँ ने कभी मुझे पिता के ना होने का अहसास भी नहीं होने दिया ! मुझे पढ़ाने की लिए जिस ने लोगों  के घर बर्तन धोये यहां तक की बीमार होते हुए भी काम किया ! खुद भूखी सोयी पर मुझे भूखा नहीं सोने दिया। मेरे परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर जो लोगों  को बता बता कर नहीं थकती थी ! आज खुद स्वंतत्र होने के लिए उसे औरों  के हवाले छोड़ आया हूँ।  मेरी माँ को क्या पसंद है क्या नहीं उन्हें क्या पता ,वह अब कैसे रहेगी। 

जब मुझे उस की जरूरत थी  तब उस ने अपना पूरा साथ दिया , पर जब उसे मेरी जरूरत थी मैं उसे बोझ समझकर छोड़  आया ! 

Photo by Oleksandr Pidvalnyi from Pexels
ये जो तेरी भाभी है मेरी माँ को नहीं समझ पाई  !पूरा दिन बस मुझे माँ के बारे में उलटा सीधा बोलते रहना ! क्या इस की माँ नहीं  है , पर ये क्या समझे इस की माँ तो माँ है और मेरी माँ हर पल गलत है ! 

परिवार को खुश रखने के लिए मुझे यही तरीका समझ में आया और मैं माँ को छोड़ आया ! अब तेरी भाभी खुश हो गयी होगी ! 

आज मैं  इसे भी स्वतंत्र  कर रहा हूँ , जैसे मैं  अपनी माँ के बिना रह सकता हूँ वैसे ये और बच्चे भी अकेले रह सकते हैं  ! मैं  इसे तलाक देकर अपनी माँ के पास जा रहा हूँ मैं  भी उस के साथ बृद्धाश्रम रहूँगा !मरे बच्चों  ने भी मेरे साथ यही तो करना है !

क्या है इंसान दुनिया को न्याय देने वाला आज अपनी माँ के साथ न्याय नहीं कर पाया , मेरे दिमाग मे कई प्रश्न चल रहे थे !

मैंने जैसे तैसे उसे समझाय और उसे कहा हम अभी माँ के पास चलेंगे और  माँ को घर लेकर आयेंगे ! भाभी जी ने भी  क्षमा याचना करते हुए यही कहा क्योंकि उन्हें पता चल चूका था अपनी गलती के बारे में !

हम बृद्धाश्रम के द्वार पर पहुंचे तो दरवान ने आगे जाने से इंकार कर दिया ,राजन ने उसे बताया की मैं जिलाधिकारी हूँ तो वो बोलै साहब अगर आप अपनी माँ के साथ न्याय नहीं कर पाए तो औरों  के साथ क्या करोगे मैं  अंदर नहीं जाने दूंगा !

राजन गिड़गिड़ाते हुए उस के पैरों  में गिर पड़ा और उस से बोला  मुझे माँ को ले जाना है कृपा कर के मुझे जाने दो ,तभी होस्टल  बार्डन वहां आयी और हमें बापस जाने को कहा ! जब हम ने उन से निवेदन किया तो वो गुस्से से तिलमिला गयी और बोली मैं आप को अंदर नहीं भेजूंगी क्या पता आप उसे बाहर ले जा कर मार दें  चुपचाप यहाँ से चले जाओ ,पहले सोचना था ,तुम लोगों  को बूढ़े बोझ लगते हैं  ना !तुम जैसी औलाद को तो पेट में ही मार देना चाहिए !

राजन यह सुनकर खुद को रोक नहीं पाया और जोर जोर से रोना शुरू कर दिया और माँ माँ बोलता रहा ! उसे देखकर शायद  होस्टल  बार्डन को दया आ गयी और वह हमें माँ के पास ले गयी !

माँ ने जब देखा पूरा परिवार वहाँ  आया है तो वह रो पडी और बोली ,राजन बीटा तू आ गया मैं  सब को बोल रही थी मेरा बच्चा ऐसा नहीं है किसी काम में व्यस्त होने के कारण मुझे यहाँ  छोड़ गया है ,लेने जरूर आएगा !

राजन बोला  चल माँ मेरे साथ चल ,वहाँ  जितने भी लोग थे सब की आँखों में ऑंसू  थे शायद वे भी सोच रहे थे की कोइ उन्हें भी लेने आएगा !माँ ने सब को अलविदा कहा ,सभी के मुँह में यही शब्द थे की ऐसा बेटा  सब को दे !

दोस्तों राजन खुशकिस्मत था जो माँ को बापस लेकर आ सका ! अगर आप में से भी कोई  ऐसा सोच रहा है तो इक बार यह भी याद कर ले की इन्हीं  माँ  बाप ने आप की हर इच्छा पूरी की ,आप को सब कुछ दिया चाहे अपनी इच्छा को मार ही क्यों नहीं दिया हो और आज आप क्या कर रहे हो ,याद रखो आप भी माँ बाप हो कल आप के साथ भी यही हो सकता है ! 




दोस्तो, अपने घर के उन विशाल हृदय वाले लोगों, जिनको आप बूढ़े और बुढ़िया की श्रेणी में रखते हैं, वे आपके जीवन के कल्पतरु हैं। उनका यथोचित आदर-सम्मान, सेवा-सुश्रुषा और देखभाल करें। यक़ीन मानिए, आपके भी बूढ़े होने के दिन नज़दीक ही हैं।...उसकी तैयारी आज से ही कर लें। 


देवियाँ भी ध्यान दें जैसे आप की माँ है वैसे ही आप के पति की भी है !जैसा आप उस के साथ करवाओगी आप का भाई भी आप की माँ के साथ भी वैसा ही करेगा !

धन्यवाद !!

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 मेरी बात कुछ लोगों के लिए तीखी है पर एक बार सोचें जरूर !

Wednesday, May 29, 2019

Family Problems and solutions,माँ बाप क्या होते हैं ???Problems and Solutions

Family Problems and solutions
माँ बाप प्यार के भूखे हैं |उन्हें कुछ समय दो |
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Photo by Andreas Wohlfahrt from Pexels


एक दंपती दीपावली की ख़रीदारी करने को हड़बड़ी में था। पति ने पत्नी से कहा, "ज़ल्दी करो, मेरे पास टाईम नहीं है।" कह कर कमरे से बाहर निकल गया। तभी बाहर लॉन में बैठी माँ पर उसकी नज़र पड़ी।

कुछ सोचते हुए वापस कमरे में आया और अपनी पत्नी से बोला, "जीया, तुमने माँ से भी पूछा कि उनको दिवाली पर क्या चाहिए?

जीया बोली, "नहीं पूछा। अब उनको इस उम्र में क्या चाहिए होगा यार, दो वक्त की रोटी और दो जोड़ी कपड़े....... इसमें पूछने वाली क्या बात है?
यह बात नहीं है जीया...... माँ पहली बार दिवाली पर हमारे घर में रुकी हुई है। वरना तो हर बार गाँव में ही रहती हैं। तो... औपचारिकता के लिए ही पूछ लेती।

अरे इतना ही माँ पर प्यार उमड़ रहा है तो ख़ुद क्यों नहीं पूछ लेते? झल्लाकर चीखी थी जीया ...और कंधे पर हैंड बैग लटकाते हुए तेज़ी से बाहर निकल गयी।

सूरज माँ के पास जाकर बोला, "माँ, हम लोग दिवाली की ख़रीदारी के लिए बाज़ार जा रहे हैं। आपको कुछ चाहिए तो..
माँ बीच में ही बोल पड़ी, "मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा।"
सोच लो माँ, अगर कुछ चाहिये तो बता दीजिए.....
सूरज के बहुत ज़ोर देने पर माँ बोली, "ठीक है, तुम रुको, मैं लिख कर देती हूँ। तुम्हें और बहू को बहुत ख़रीदारी करनी है, कहीं भूल न जाओ।" कहकर सूरज की माँ अपने कमरे में चली गईं। कुछ देर बाद बाहर आईं और लिस्ट सूरज को थमा दी।......  

           
सूरज ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोला, "देखा जीया, माँ को भी कुछ चाहिए था, पर बोल नहीं रही थीं। मेरे ज़िद करने पर लिस्ट बना कर दी है। इंसान जब तक ज़िंदा रहता है, रोटी और कपड़े के अलावा भी बहुत कुछ चाहिये होता है।"


अच्छा बाबा ठीक है, पर पहले मैं अपनी ज़रूरत का सारा सामान लूँगी। बाद में आप अपनी माँ की लिस्ट देखते रहना। कहकर शालिनी कार से बाहर निकल गयी।

पूरी ख़रीदारी करने के बाद जीया बोली, "अब मैं बहुत थक गयी हूँ, मैं कार में A/C चालू करके बैठती हूँ, आप अपनी माँ का सामान देख लो।"
अरे जी़या तुम भी रुको, फिर साथ चलते हैं, मुझे भी ज़ल्दी है।
देखता हूँ माँ ने इस दिवाली पर क्या मँगाया है? कहकर माँ की लिखी पर्ची ज़ेब से निकालता है।

बाप रे! इतनी लंबी लिस्ट, ..... पता नहीं क्या - क्या मँगाया होगा? ज़रूर अपने गाँव वाले छोटे बेटे के परिवार के लिए बहुत सारे सामान मँगाये होंगे। और बनो *श्रवण कुमार*, कहते हुए जीया गुस्से से सूरज की ओर देखने लगी।

पर ये क्या? सूरज की आँखों में आँसू........ और लिस्ट पकड़े हुए हाथ सूखे पत्ते की तरह हिल रहा था..... पूरा शरीर काँप रहा था।
जीया बहुत घबरा गयी। क्या हुआ, ऐसा क्या माँग लिया है तुम्हारी माँ ने? कहकर सूरज के हाथ से पर्ची झपट ली....
हैरान थी जीया भी। इतनी बड़ी पर्ची में बस चंद शब्द ही लिखे थे.....
*पर्ची में लिखा था....*     
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"बेटा सूरज मुझे दिवाली पर तो क्या किसी भी अवसर पर कुछ नहीं चाहिए। फिर भी तुम ज़िद कर रहे हो तो...... तुम्हारे शहर की किसी दुकान में अगर मिल जाए तो *फ़ुरसत के कुछ पल* मेरे लिए लेते आना.... ढलती हुई साँझ हूँ अब मैं। सूरज, मुझे गहराते अँधियारे से डर लगने लगा है, बहुत डर लगता है। पल - पल मेरी तरफ़ बढ़ रही मौत को देखकर.... जानती हूँ टाला नहीं जा सकता, शाश्वत सत्‍य है..... पर अकेलेपन से बहुत घबराहट होती है सूरज।...... तो जब तक तुम्हारे घर पर हूँ, कुछ पल बैठा कर मेरे पास, कुछ देर के लिए ही सही बाँट लिया कर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन।.... बिन दीप जलाए ही रौशन हो जाएगी मेरी जीवन की साँझ.... कितने साल हो गए बेटा तुझे स्पर्श नहीं किया। एक बार फिर से, आ मेरी गोद में सर रख और मैं ममता भरी हथेली से सहलाऊँ तेरे सर को। एक बार फिर से इतराए मेरा हृदय मेरे अपनों को क़रीब, बहुत क़रीब पा कर....और मुस्कुरा कर मिलूँ मौत के गले। क्या पता अगली दिवाली तक रहूँ ना रहूँ.....
पर्ची की आख़िरी लाइन पढ़ते - पढ़ते जीया फफक-फफक कर रो पड़ी.....
*ऐसी ही होती हैं माँ.....*

दोस्तो, अपने घर के उन विशाल हृदय वाले लोगों, जिनको आप बूढ़े और बुढ़िया की श्रेणी में रखते हैं, वे आपके जीवन के कल्पतरु हैं। उनका यथोचित आदर-सम्मान, सेवा-सुश्रुषा और देखभाल करें। यक़ीन मानिए, आपके भी बूढ़े होने के दिन नज़दीक ही हैं।...उसकी  तैयारी आज से ही कर लें। इसमें कोई शक़ नहीं, आपके अच्छे-बुरे कृत्य देर-सवेर आप ही के पास लौट कर आने हैं।पूरा जीवन कमाते रहे ,किस के लिए ,बस आप के लिए ,और अब आप उन्हें दो मिनट का समय भी दे नहीं पा रहे |
मेरी बातें कुछ लोगों तो कड़वी लगेंगी ,इसमें आप का घाटा मेरा कुछ नहीं जाता |

*कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया अग्रसारित अवश्य कीजिए। शायद किसी का हृदय परिवर्तन हो जाए और.....*


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