शनिवार, 1 मई 2021

वायरल कोरोना कविता |कोरोना का प्रभाव|Viral Corona Kavita | Effects of Corona

 वायरल कोरोना कविता |कोरोना का प्रभाव


🐾भूख बढ़ गई पैसे कि,रोग का हो रहा व्यापार ,

दया भावना रही नहीं,मानसिक्ता हुई पड़ी बिमार |

जीवन दाता माना तुझको ,तुझको माना है भगवान,

अंधा बहरा हुआ पड़ा है,है कैसा तू इंसान||🐾


Photo by Karolina Grabowska from Pexels


🐛हवा बिक रही,पानी बिक रहा ,

नहीं है पैसा,तो मुर्दा भी बिक रहा |

छीन लिए मूर्दे के कंगन,छीन ली किसी की साँसें ,

तड़फ रहा है कोई,धूमिल पड़ी किसी कि बाँछें ||🐛



🦃भाई किसी का,बहन किसी की ,

बाप किसी का ,माँ किसी कि |

मान किसी का ,जान किसी कि,

दिन किसी का रात किसी कि |

हाथ जोड़े खड़ा बाप ,रो रही है माँ किसी कि ,

तेरा तो कोई नहीं,क्यों सुने फर्याद किसी कि ||🦃



💰गुर्दे बेचे तीन ,लीवर बेचा पाँच लाख,

लाखों में बेचा दिल,जाने कैसी तेरी साख|

कफन बेचा ,लकड़ी बेची,बेच दिया अंतिम संस्कार |

क्या सोच रहा है तू ,होगा इक दिन तू भी खाक ||💰


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