शुक्रवार, 21 मई 2021

देश प्रेम कविता |Poem on love for country

 

सोया शेर


देश प्रेम है मुझ में,देश से है प्यार |

तिरछी नज़र देखा भी,दूँगा सिर उखाड़ ||


किस का फैसला है ,किस का है अधिकार,

आश्रय दिया जिसे ,कर रहा प्रहार |

सोया  पड़ा शेर है,गीदड़ कर रहे वार,

झुँड बनाए बैठे हैं ,बने पड़े हैं काल ||


देश प्रेम है मुझ में,देश से है प्यार |

तिरछी नज़र देखा भी,दूँगा सिर उखाड़ ||


गुड्डे गुड्डियाँ सब तोड़ दिए ,

बर्बाद किया घर बार |

जिस घर में खेले थे ,

उजाड़ दिया संसार ||


देश प्रेम है मुझ में,देश से है प्यार |

तिरछी नज़र देखा भी,दूँगा सिर उखाड़ ||


एक शेर को फर्क नहीं ,जब पड़ता दूजे शेर का,

तब कुत्ते घेर लेते ,शेर का भी रास्ता |

बंद रखता जब आँखें,नहीं रखता जब वास्ता,

जिम्मेदार होता है वह ,हर तरह के नाश का ||


देश प्रेम है मुझ में,देश से है प्यार |

तिरछी नज़र देखा भी,दूँगा सिर उखाड़ ||


अकेला ही झंडा उठा ,दे धरती में गाड़,

पंजों को तेज़ कर,इक बार तो दे दहाड़ |

मृत्यू तो है ही ,फिर किस का है इंतज़ार,

शेर को जगा अब,शत्रू कि छाती फाड़ |


देश प्रेम है मुझ में,देश से है प्यार |

तिरछी नज़र देखा भी,दूँगा सिर उखाड़ ||


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