रविवार, 29 दिसंबर 2019

एक सैनिक कि जवानी देश प्रेम कि कहानी

एक सैनिक कि जवानी देश प्रेम कि  कहानी 


वतन का मैं सहारा हूँ , वतन मेरा सहारा है | वतन कि  इन जमीनों को जख्मों  से दुलारा है || कोई  जा के ये कह दे उन जमीनों के शैतानों  से | कदम रखा तो टकराओगे लोहे कि दीवारों से || 

वतन के वासते जीना , वतन के वासते मरना | हम ने बस ये सीखा है वतन पे जान फ़िदा करना || के रखोगे कदम अपने मेरी इन जमीनों पे। नहीं पाओगे सर अपने, इन नापाक कंधो पे || 


के माँ को भूल आये हैं , बहन को भूल आये हैं | वतन के वासते हम तो, सब कुछ छोड़ आये हैं || बस इतनी गुजारिस है, देश के नौनिहालों से | याद रखना हम को भी ,सुख भरे लम्हों में || 



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