शुक्रवार

हास्य व्यंग्य शायरी || हास्य शायरी || Hasya Shyari || शायरी || Chand Shyari

हास्य व्यंग्य शायरी || हास्य शायरी || Hasya Shyari || शायरी

Chand Shyari
चाँद शायरी
1

चाँद को देख रहा हूँ ,चाँदनी बिछड़ी सी है |
अंधेरी रात में रोशनी बिखरी सी है |
चाँद बेचारा बुझा सा है ,
आज कहानी बिसरी सी है ||

2

रात में बाहर निकला,
दिन सा लग रहा है,
आज चाँदनी में नहा रहा है चाँद,
दिल सा लग रहा है|
चाँद था चाँदनी के आगोश  में ,
तभी चाँद खिला सा लग रहा है |

3

चाँद ज्यों-ज्यों चढ़ रहा आकाश में,
यादें ले रहीं मुझे आगोश में |
तेरे साथ कही बैठा था ,
एसी ही एक चाँदनी रात में |
तुझ को देख रहीं थीं नज़रें,
कुछ तो बोल रहीं थी नज़रें,
नज़रों के सागर में गोते लगा,
कुछ तो ढूँढ रही थी नजरें ||






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