शनिवार, 16 मई 2020

शायरी 3,दारू पर शायरी

शायरी 3,दारू पर शायरी

1. 


हाथों में तेरे मय का प्याला, 
मस्ती में झूमे जा रहा है तू |
ये पीना और पिलाना जिसने सिखाया,

उसे ही घूरे जा रहा है तू ||

2.

मय जब से तू पीने लगा है, 
असर आँखों पे दिखने लगा है |
मस्ती सी रहती है चाल में तेरी, 

बोतल पे तेरा भी असर दिखने लगा है ||

3.

खाली ये बोतल, किनारे फैंक कर, 
नहीं पी तूने, बैठा है यह मानकर|
बोतल भरी पड़ी है, अलमारी में, 
ललचाए जा रहा  यह जानकर |
जैसे ही उठाने को हुआ बोतल, 
खड़ा हो भी ना पाया पैरों पर ||

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