Himachali Kavita | हिमाचली कविता (मेरी लाड़ी)

Himachali Kavita | हिमाचली कविता (मेरी लाड़ी)


मेरी लाड़ी
लग्गी नौकरी होया जवान,
बयाही ता मुन्डू,जित्या जहान |
लाड़ी मेरी बड्डी कपत्ती,
भयागा छोड़ें उट्ठी नी सकदी,
हाखीं रैंदियाँ त्योरी व्योरियाँ,
पता नी कुई ते लै आँदे एड़ी छोकरियाँ |
वाह वाह वाह वाह मेरी लाड़ी,
जानी ते प्यारी मेरी लाड़ी,
सारेयाँ ते छैल मेरी लाड़ी ||

रोटी बणाँदी खाँदी जानी,
चाह तिसा जो बणाणा नी भाँदी,
खूने पींदी,दमागे खाँदी,
कुछ बोलेआ ताँ पटगदी जाँदी,
वाह वाह वाह वाह मेरी लाड़ी,
जानी ते प्यारी मेरी लाड़ी,
सारेयाँ ते छैल मेरी लाड़ी ||

बजारे जाँदी खुश रैंदी,
घुमणे फिरने च मजे च रैंदी,
आराम करना बड्डा भाए,
बस उठणेओं कोई ना गलाए,
वाह वाह वाह वाह मेरी लाड़ी,
जानी ते प्यारी मेरी लाड़ी,
सारेयाँ ते छैल मेरी लाड़ी ||

साथी है मेरी,राह है मेरी,
मेरिआ माऊ दी सेवा करे भतेरी,
कराँदी पढ़ाई बच्चेयाँ दी,
चिंत्ता करे रिश्तेआँ दी|
दूजे कुसी जो जबाब नी दिन्दी,
पहाड़ी भी जाणदी,कन्ने जाणदी हिन्दी,
वाह वाह वाह वाह मेरी लाड़ी,
जानी ते प्यारी मेरी लाड़ी,
सारेयाँ ते छैल मेरी लाड़ी ||


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